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पाली में धूमधाम से निकली भोले बाबा की बारात, नाथ पार्टी बनी आकर्षण का केंद्र

महिलाओं ने कलश रखकर किया स्वागत, शिवभक्तों ने जमकर किया नृत्य, आतिशबाजी से गूंजा नगर

पाली। नगर में महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर भगवान भोलेनाथ की बारात बड़े ही श्रद्धा और धूमधाम के साथ निकाली गई। बारात में शामिल शिवभक्तों ने पूरे उत्साह के साथ नाचते-गाते हुए नगर को भक्तिमय माहौल में सराबोर कर दिया। बारात के दौरान जगह-जगह आतिशबाजी की गई, जिससे पूरा नगर जयकारों और उत्सव की गूंज से भर गया।

भोले बाबा की बारात नगर के प्रमुख मार्गों से होकर निकाली गई। बारात में विशेष आकर्षण का केंद्र “नाथ पार्टी” रही, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़ पड़े। नाथ पार्टी के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत धार्मिक और सांस्कृतिक प्रदर्शन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

बारात में शिव के गले में असली सांप पहनाया गया, जिसे देखकर लोगों में कौतूहल बना रहा। श्रद्धालुओं ने इसे आस्था और शिवभक्ति का प्रतीक बताते हुए “हर-हर महादेव” के जयकारे लगाए।

बारात में भगवान ब्रह्मा, विष्णु, नारद मुनि तथा भूतों की टोली की झांकियां भी निकाली गईं। इन झांकियों ने शिव विवाह प्रसंग को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। नगरवासियों ने झांकियों की सराहना करते हुए पुष्पवर्षा की और बारातियों का स्वागत किया।

नगर में जगह-जगह महिलाओं द्वारा कलश रखकर बारात का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। गली-गली और घर-घर धार्मिक वातावरण दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने बारातियों को जलपान कराकर स्वागत किया।

बारात में राजा हिमाचल की भूमिका निभाने वाले पात्र द्वारा बारातियों का स्वागत-सम्मान किया गया। शिव-पार्वती विवाह की परंपरा को निभाते हुए पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने योग्य रही।

कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। अपर पुलिस अधीक्षक कालूराम, क्षेत्राधिकारी अजय कुमार तथा पाली थाना प्रभारी निरीक्षक दीपक कुमार अपने दल-बल के साथ मौके पर मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों ने पूरे आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और शांतिपूर्ण तरीके से बारात संपन्न कराई।

शिवभक्तों की भारी भीड़ के बावजूद आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। अंत में बारात निर्धारित स्थल पर पहुंचकर संपन्न हुई, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

नगरवासियों ने इस आयोजन को परंपरा और श्रद्धा का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों से समाज में एकता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलता है।

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