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जिनके हाथ होनी चाहिए कॉपी-किताब, वह नौनिहाल बेच रहे कच्ची शराब के पाउच

 

 

बुंदेलखंड में कच्ची शराब पीने से हुई थी कई मौत सो रहा पुलिस और आबकारी विभाग

कोतवाली क्षेत्र बना रिश्वत का खेल गोदाम

ललितपुर=योगी सरकार गरीबों के लिए पढ़ाई से लेकर नौकरी तक सरकारी योजना धरातल पर उतार रही है लेकिन एक तरफ बुंदेलखंड के जिला ललितपुर के कोतवाली तालबेहट क्षेत्र में जिनके हाथों में कॉपी-किताब होनी चाहिए वह नौनिहाल कच्ची शराब के पाउच बेच रहे हैं। यह सुनकर आप को थोड़ा अचम्भा जरूर लगेगा लेकिन यह सच है। बुंदेलखंड के ललितपुर के तालबेहट कोतवाली क्षेत्र तरगुवा में कबूतरा सामुदायिक के लोग लोग कच्ची शराब का कारोबार कर रहे हैं। कच्ची शराब के कारोबारी शराब बनाकर बेच भी रहे हैं। पुलिस और आबकारी महकमा आंख बंद किये बैठा है। हालात यह हैं कि शराब के कारोबारियों ने छोटे बच्चों को इस काम में लगा दिया है। और इन मासूमों को बैठाकर कच्ची शराब बेचवाने का सिलसिला जारी है

 

बुंदेलखंड में कच्ची शराब पीने से कितनी महिलाओं की मांग की सिंदूर उजड़ गया

 

बुंदेलखंड के झांसी महोबा,ललितपुर में कच्ची शराब पीने से कितनी जिंदगियां शमशान घाट में तबिस्त हो गया है लेकिन अभी भी स्थानीय प्रशासन सबक नहीं ले रहा है। कच्ची शराब बनाकर बेचने वालों पर कार्यवाई करने के बजाये प्रशासन व आबकारी विभाग आंख बन्द किये बैठा है। पड़ताल के दौरान इस बात का खुलासा हुआ कि जिन हाथों में कापी किताब होना चाहिए उन हाथों में अवैध तौर से निर्मित शराब के पाउच है।तालबेहट कोतवाली क्षेत्र के आस-पास के गांव अवैध कच्ची शराब के कारोबारियों ने अपने धंधे को नया रूप दे दिया है। पहले लोग भट्ठी पर जा कर बोतल में शराब लाते थे लेकिन अब समय के साथ इनके धंधे में शराब का पाउच बना कर बोरिया फिर पलास्टिक में भर कर लाते हैं और निर्माणाधीन बाउंड्री के पास गड्ढा खोद कर छुपा देते हैं या पेड़ के पीछे छिपा देते है और बैठकर और अपने मस्ती में रहकर ग्राहकों का इंतजार करते है। शराब के शौकीन सुबह से ही कच्ची शराब के अड्डे पर चलना शुरू कर देते 10-12 साल के बच्चे उनकी जरुरत के हिसाब से पाउच उपलब्ध करा देते हैं किसी ठेके या दुकान पर जाने की जरुरत भी नहीं है। यह कारोबार बिना स्थानीय पुलिस के सहयोग से चल नहीं सकता। शायद यही कारण है कि कोई कार्यवाही नहीं होती हैं जिसके कारण बेखौफ कारोबारी धड़ल्ले से अपना धंधा चला रहे हैं स्थानीय सूत्रों की माने तो यह कारोबार कई सालों से चल रहा है। जमालपुर,हर्ष पुर, तेरई फाटक, सेरवास कला,रामपुर,और तालबेहट इलाके में बनने वाली शराब तो विकती ही है उसके साथ गांव से भी कच्ची शराब बनाने वाले कारोबारी यहां लाकर अपना धन्धा करते हैं। वह लोग प्लास्टिक के पाउच बनाकर लाते है और 20- 40 रुपये पाउच बेचते हैं। सस्ती व नशीली होने के कारण मजदूर व लेबर ठेकेदार इनकी शराब खरीदते हैं।

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