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केरल चुनाव: राहुल गांधी ने LDF और NDA पर साधा तीखा हमला, दोनों में गुप्त समझौते का आरोप

नई दिल्ली, भारत

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने भारत की संप्रभुता को समझौता कर दिया है। राहुल गांधी ने पीएम मोदी के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति अत्यधिक सम्मान दिखाने को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और दावा किया कि मोदी ने भारत के हितों की अनदेखी कर दी है।

राहुल गांधी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने जो व्यवहार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति दिखाया है, वह भारत की संप्रभुता के लिए खतरा है। जब आप अपनी संप्रभुता का सम्मान खो देते हैं, तो देश की सुरक्षा और समृद्धि खतरे में पड़ जाती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अपनी विदेश नीति में असंतुलन दिखाया है जिससे भारत के स्वतंत्र फैसलों पर प्रभाव पड़ा है।

राहुल गांधी ने कहा कि भारत के लिए अमेरिका महत्वपूर्ण साझेदार जरूर है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि किसी अन्य देश के नेता को ऐसे सम्मान दिया जाए कि वह हमारे राष्ट्रीय हितों से समझौता कर दें। उन्होंने कहा, “साथी राष्ट्र के बीच सम्मान बराबरी के आधार पर होना चाहिए, न कि एकतरफा सम्मान से।”

राहुल गांधी के इस बयान के पश्चात राजनीतिक दलों में बहस तेज हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी की इस आलोचना को अनुचित बताया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हमेशा देश के हित में काम करते रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “प्रधानमंत्री मोदी का हर कदम भारत के हित में है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का सम्मान बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बयान देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।”

विश्लेषकों के अनुसार, राहुल गांधी की यह आलोचना आगामी राज्य चुनावों और लोकसभा चुनाव के संदर्भ में राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी है। उन्होंने कहा कि इस बयान से कांग्रेस पीएम मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठा कर जनता को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अजय शर्मा कहते हैं, “राहुल गांधी की यह टिप्पणी नरेंद्र मोदी सरकार की विदेश नीतियों पर भारतीय जनता के बीच विवाद पैदा करने की कोशिश है। यह चुनावी रणनीति का एक हिस्सा माना जा सकता है।”

इस पूरे परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दे ने देश में एक बार फिर यह बहस प्रारंभ कर दी है कि भारत की विदेश नीति और उसकी संप्रभुता को लेकर किस तरह के दृष्टिकोण अपनाए जाने चाहिए। आगामी समय में यह देखना होगा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक तापमान किस दिशा में बढ़ता है और जनता की प्रतिक्रिया कैसी रहती है।

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