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जिले मेें नहीं चलेगी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी, जिलाधिकारी ने दिए आदेश

जिले मेें नहीं चलेगी निजी स्कूलों की मनमानी, अधिक फीस वसूलने, चिन्हित दुकानों से जूते, मोजे, किताबें और यूनिफार्म क्रय करने को बाध्य नहीं कर सकते निजी विद्यालय : जिलाधिकारी

शासन के मानकों की अनदेखी करने वाले विद्यालयों के सम्बंध में डीआईओएस व बीएसए से एक सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

अभिभावकों के लिए जायेंगे बयान, आरोप सत्य पाये जाने पर सम्बंधित विद्यालयों पर होगी कठोर कार्यवाही
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ललितपुर। जनपद में शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरु होने के साथ ही निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से अधिक शुल्क वसूले जाने, चिन्हित दुकानों से जूते, मोजे, किताबें और यूनिफार्म आदि की अनिवार्य खरीद कराये जाने सम्बंधी अनेकों शिकायतें भी प्राप्त होने लगी हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है और छात्र-छात्राओं की शिक्षा भी प्रभावित होती है। ऐसी सभी शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी सत्य प्रकाश ने जिला विद्यालय निरीक्षक व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के साथ बैठक कर जिले के समस्त निजी/स्ववित्त पोषित विद्यालयों के सम्बंध में जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिये हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि विद्यालयों के द्वारा नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
इस सम्बंध में जिलाधिकारी ने कहा है कि जिले मेें निजी स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी, निजी विद्यालय अधिक फीस वसूलने के साथ चिन्हित दुकानों से जूते, मोजे, किताबें और यूनिफार्म आदि क्रय करने के लिए बच्चों व अभिभावकों को बाध्य नहीं कर सकते हैं। शासन द्वारा निर्धारित मानकों की अनदेखी करने वाले विद्यालयों के सम्बंध में डीआईओएस व बीएसए से एक सप्ताह में जांच रपोर्ट मांगी गई हैं, जिसमें अभिभावकों बयान भी दर्ज किये जायेंगे। यदि आरोप सत्य पाये जाते हैं तो सम्बंधित विद्यालयों पर कठोर कार्यवाही की जाएगी।*
ज्ञातत्व है कि विगत कई दिनों से समाचार पत्रों व विभिन्न माध्यमों से शिकायतें प्राप्त हो रहीं थीं कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 की धारा-1 के अन्तर्गत जनपद में संचालित निजी/स्ववित्त पोषित विद्यालयों द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक धनराशि वसूले जाने, पुस्तकों एवं यूनिफार्म की अनिवार्य खरीद कराए जाने तथा कैपिटेशन फीस ली जा रही है, ऐसी शैक्षिक संस्थाओं द्वारा अपने छात्रों से प्रभारित किये जाने वाले शुल्क आदि व्यवस्थाओं/सुविधाओं को विनियमित करने वाली प्रभावी विधि का नियमतः अनुपालन न करने के परिणाम स्वरूप छात्रों एवं उनके संरक्षकों को अनावश्यक वित्तीय भार का सामना करना पडता है, जिससे छात्रों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है, जो लोकहित में नहीं है।
_जिलाधिकारी ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीआईओएस व बीएसए को निर्देश दिये हैं कि वे ऐसे सभी विद्यालयों के सम्बंध में बिंदुवार जांच करें कि विद्यालयों की शुल्क संरचना के सम्बन्ध में उक्त संदर्भित अधिनियम की धारा-3 (7) व 4 का पालन किया जा रहा है अथवा नहीं। धारा-3(8) में प्राविधानित है कि प्रत्येक मान्यता प्राप्त विद्यालय यह सुनिश्चित करेगा कि कोई कैपिटेशन शुल्क प्रभारित न किया जाये। विद्यालय द्वारा इसका अनुपालन किया जा रहा है अथवा नहीं। धारा-3 (10) में प्राविधानित है कि किसी छात्र को पुस्तकें, जूते, मोजे व यूनिफार्म आदि किसी विशिष्ट दुकान से कय करने के लिये बाध्य नहीं किया जायेगा। विद्यालयों द्वारा इसका अनुपालन किया जा रहा है अथवा नहीं। धारा-4 (11) में प्राविधानित है कि विद्यालय द्वारा पाँच निरन्तर शैक्षणिक वर्षों के भीतर पोशाक में परिवर्तन नहीं किया जायेगा, यदि परिवर्तन अपेक्षित हो तो इसमें परिवर्तन जनपदीय शुल्क नियामक समिति के पूर्व अनुमोदन से समुचित औचित्य के साथ किया जा सकता है। विद्यालयों द्वारा इस नियम का पालन किया जा रहा है अथवा नहीं। सी०बी०एस०ई०की गाईड लाईन के कम में स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें अनुमन्य हैं, इसके अतिरिक्त किताबों को अभिभावकों पर जबरन थोपा नहीं जा सकता है। इसकी भी जाँच की जाये। अभिभावकों से आवश्यक जानकारी/बयान प्राप्त किये जाएं। यदि जाँच में आरोप सत्य पाये जाते हैं, तो संबंधित विद्यालय के विरूद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही करायी जाये।

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