आखिरकार कैसे होगा कुपोषणमुक्त जनपद? चिन्हित किये गये 3002 कुपोषित बच्चों में से केवल 183 बच्चों को दिया गया उपचार

ललितपुर। कुपोषण को रोकने के लिए सरकार द्वारा तमाम योजनाएं संचालित की जा रही है, इसके क्रियान्वयन के लिए रूपया पानी की तरह बहाया जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी के कर्मचारियों की उदासीनता इसमें आड़े आ रही है। हालात यह है कि माह जून में चिन्हित किये गये 3002 कुपोषित बच्चों में से माह अगस्त तक केवल 1645 कुपोषित बच्चों का ई पोर्टल पर पंजीकरण हो सका है, जबकि पंजीकरण के बाद 641 बच्चों को चिन्हित किया गया है, जो केवल 21 प्रतिशत है, जबकि 3002 कुपोषित बच्चों में से केवल 183 बच्चों को उपचारित किया गया है, जबकि 429 बच्चे ऐसे है, जिन्हें आज तक मूलभूत दवाएं उपलब्ध नहीं कराई गई है और न ही एनआरसी रिफर किया गया है। उनके स्वास्थ्य प्रबंधन हेतु संबंधित एएनएम एवं संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की कई है। इस सम्बन्ध में जिला कार्यक्रम अधिकारी नीरज कुमार ने कड़ा रूख अख्तियार करते हुए समस्त बाल विकास परियोजना अधिकारियों को पत्र जारी करते हुए इस कार्य में रूचि लेने के निर्देश जारी किये है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय से मिले आकड़ों के अनुसार जनपद में कुल 1124 आंगनबाड़ी केन्द्र है। जिनमें 3002 बच्चों को कुपोषित चिन्हित किया गया था, जिनमें से ई पोर्टल पर 1645 बच्चों का पंजीकरण हुआ है, जबकि 641 बच्चों को पंजीकरण करने के बाद चिन्हित किया जा सका है। इस प्रकार जिम्मेदारों द्वारा कुल 21 प्रतिशत कुपोषित बच्चों का पंजीकरण हो सका है। जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा सौंपे गये पत्र में निर्देश दिये गये है कि निर्देशक बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार उत्तर प्रदेश लखनऊ एवं मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा संयुक्त रूप से कड़ा रूख व्यक्त किया गया है। उन्होंने निर्देश दिये कि पोषण ट्रेकर पर चिन्हित अवशेष 1357 कुपोषित बच्चों का एएनएम एवं सीएचओ द्वारा स्क्रीनिंग कर स्क्रीनिंग में पाये गये सेम बच्चों का ई कवच पोर्टल पर शत प्रतिशत पंजीकरण कराया जाये। ई कवच पर चिन्हित सतस्त कुपोषित बच्चों का 2 तरह से स्वास्थ्य प्रबंधन किया जाना है, जिसमें बिना चिकित्सीय जटिलता वाले समस्त कुपोषित बच्चों को संबंधित एएनएम एवं सीएचओ द्वारा मूलभूत दवाएं उपलब्ध कराई जाये। इसके अलावा चिकित्सीय जटिलता वाले चिन्हित समस्त कुपोषित बच्चों को एनआरसी में रेफर किया जाये।
यह है स्थिति
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने निर्देश दिये कि पोषण ट्रेकर पर चिन्हित 3002 कुपोषित बच्चों के सापेक्ष अब तक संबंधित आशा, एएनएम एवं सीएचओ द्वारा केवल 1645 कुपोषित बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है। स्क्रीन किये गये बच्चों के सापेक्ष 641 बच्चों को ई कवच पोर्टल पर कुपोषित के रूप में चिन्हित किया गया है। ई कवच पोर्टल पर चिन्हित कुपोषित बच्चों के सापेक्ष केवल 183 बच्चों को मूलभूत दवाएं उपलब्ध कराई गई है। चिकित्सीय जटिलता वाले चिन्हित 47 कुपोषित बच्चों के सापेक्ष केवल 29 बच्चों को एनआरसी संदर्भित किया गया है। ई कवच पोर्टल पर अभी तक चिन्हित 429 कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य प्रबंधन हेतु एएनएम एवं सीएचओ द्वारा कोई कारवाई नहीं की गई है, जिस कारण जनपद की रैकिंग खराब प्रदर्शित हो रही है।