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तालाब से नहीं, गंगाजल से होता अभिषेक

बीस साल में सुम्मेरा तालाब का पानी नहीं हो सका निर्मल
श्री रामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति मुहैया कराती गंगाजल
ललितपुर। लाखों रुपये खर्च किए जाने के बाद भी सुम्मेरा तालाब का पानी निर्मल नहीं हो सका है। इस वजह से जल विहार के अवसर पर भगवान के विग्रह का अभिषेक गंगाजल से किया जाता है। इसकी व्यवस्था का जिम्मा श्री रामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति संभाल रही है। ऐसा करते हुए समिति को करीब बीस साल हो गए हैं। समिति के अध्यक्ष का कहना है कि समिति की ओर से सभी विमानों के पंडित, पुरोहितों को गंगाजल भगवान के अभिषेक के लिए उपलब्ध कराया जाता है। इस बार भी गंगाजल का इंतजाम किया जा रहा है।
धार्मिक कार्यक्रमों में जल विहार बड़े आयोजनों में से एक है। डोल ग्यारस पर जब मंदिरों से विमान उठते हैं तो उनके पीछे सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु चल पड़ते हैं। इस दौरान सुम्मेरा तालाब पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखते ही बनती है। तालाब के घाटों पर पैर रखने की जगह नहीं मिलती है। इसके बाद भी हजारों की संख्या श्रद्धालु जैसे-तैसे खड़े होकर भगवान के जल विहार के गवाह बनते हैं। इस आयोजन को देखने के लिए श्रद्धालु वर्षभर इंतजार करते हैं। जिस स्थल पर इतना भव्य कार्यक्रम होता है, उस सुम्मेरा तालाब में बह रहे पानी को अब तक निर्मल नहीं बनाया जा सका है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि सुम्मेरा तालाब पर आयोजित होने वाले जल विहार कार्यक्रम में गंगाजल से भगवान के विग्रह का अभिषेक कराया जाता है। इसकी व्यवस्था श्री रामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति द्वारा कराई जाती है। पिछले बीस साल से यह सिलसिला चला आ रहा है। बता दें कि सुम्मेरा तालाब के सौंदर्यीकरण पर नगर पालिका लाखों रुपये खर्च कर चुकी है और शासन ने एक बार फिर सुम्मेरा तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए धन आवंटित कर दिया है। उधर, नागरिकों का कहना है कि सुम्मेरा तालाब में एकत्रित पानी को निर्मल क्यों नहीं बनाया जा सका। आखिर कहां कमी रह गई। बता दें कि तालाब के पानी को निर्मल बनाने के लिए विभिन्न प्रजातियों की मछलियां भी छोड़ी गई थीं। इसके बाद भी तालाब में घास व तैरते विभिन्न प्रजातियों के पौधे उग आए हैं, जो तालाब के पानी को खराब कर रहे हैं। इसके अलावा वोट क्लब के दौड़ती स्टीमर भी कुछ हद तक इस समस्या को बढ़ा रहे हैं।
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जल संस्थान की ओर से रखे जाते थे ड्रम
जब सुम्मेरा तालाब का पानी प्रदूषित था, तब जल संस्थान की ओर जल विहार कार्यक्रम के दौरान पानी से भरे ड्रम रखवाए जाते थे। हालांकि, सुम्मेरा तालाब का सौंदर्यीकरण होने के पश्चात ड्रम रखने बंद हो गए।

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