केरल विधानसभा चुनाव 2026: कझाकुट्टम में तीन ध्रुवीय मुकाबला, पैन-केरल और स्थानीय मुद्दे टकराते हुए
तिरुवनंतपुरम, केरल: आगामी केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कझाकुट्टम विधानसभा क्षेत्र में एक बेहद रोचक और तीव्र मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस क्षेत्र में तीन प्रमुख पार्टियों के बीच कड़ी टक्कर है जहां पैन-केरल स्तर के मुद्दे और स्थानीय विकास की जरूरतें आमने-सामने हैं। भाजपा के V. मुरलीधरन स्थानीय विकास की मांगों को प्रमुखता से उठाते नजर आ रहे हैं, जबकि वर्तमान विधायक और वामपंथी पार्टी CPI(M) के कडकंपल्ली सुरेंद्रन अपने कार्यकाल के रिकॉर्ड की जमकर पक्षपोषण कर रहे हैं। केंद्रीय विवादों और हाल ही में गोल्ड चोरी मामले की जांच के बीच सुरेंद्रन पर तगड़ा दबाव है।
कांग्रेस के उम्मीदवार टी. सरथचंद्र प्रसाद इस क्षेत्र में पार्टी की खोई हुई छवि को दोबारा स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं। कझाकुट्टम का मतदाता वर्ग विविध है, जहां बुनियादी सुविधा, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के मुद्दे सर्वोपरि हैं। स्थानीय जनता की अपेक्षा है कि विधायक क्षेत्र की रोजमर्रा की समस्याओं को समझें और उनका त्वरित समाधान करें।
विश्लेषकों के अनुसार, कझाकुट्टम विधानसभा क्षेत्र में यह चुनाव केवल राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष नहीं है बल्कि यह मतदाता के लिए यह तय करने का मौका भी है कि वे किसे अधिक भरोसेमंद नेता मानते हैं जो उनके विकास के मुद्दों को प्राथमिकता देगा। भाजपा के V. मुरलीधरन ने क्षेत्र में कई विकास परियोजनाएं शुरू की हैं और उनका दावा है कि भविष्य में इनको और बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं, CPI(M) के सुरेंद्रन का कहना है कि उनकी सरकार ने पिछले कार्यकाल में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम किया है।
हालांकि कांग्रेस के टी. सरथचंद्र प्रसाद की चुनौती भी कम नहीं है। उन्होंने क्षेत्र की जमीनी परेशानियों को लेकर जनसंपर्क अभियान तेज किया है और युवा तथा महिलाओं के समर्थन को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। कहा जा रहा है कि यह चुनाव कझाकुट्टम की राजनीति में एक नया रुख ले सकता है, जहां वोटर्स द्वारा स्थानीय और पैन-केरल दोनों तरह के मुद्दों को गंभीरता से देखा जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं की उचित कार्यान्वयन और पारदर्शिता ही इस चुनाव का निर्णायक कारक होगी। साथ ही, वे सभी प्रत्याशियों से अपेक्षा रखते हैं कि वे विकास और कल्याण के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए बिना किसी विवाद में उलझे अपने एजेंडे पर काम करें।




