बारिश में नष्ट हुई चने की फसल: महिला किसान ने कलेक्टर से 10 बोरी प्रति बीघा मुआवजे की मांग की
अजमेर, राजस्थान। जिले में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार अप्रत्याशित बारिश ने किसान समुदाय की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खासतौर पर नसीराबाद तहसील के ग्राम गादेरी में एक महिला किसान की चने की फसल पूरी तरह से खराब हो गई है, जिससे वह गंभीर आर्थिक संकट में फंसी है। इस परेशानी के चलते महिला किसान ने अजमेर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मुआवजे की मांग की है।
पीड़ित किसान महिला का नाम मनफूल है, जो कशरा नंबर 503 पर लगभग 10 बीघा भूमि और कशरा नंबर 512 पर लगभग 3 बीघा 10 बिस्वा भूमि में चना की खेती करती हैं। उन्होंने बताया कि फसल करीब एक माह पहले पकने के बाद खेत में ही रखी गई थी। अचानक हुई भारी बारिश के कारण फसल सड़कर पूरी तरह नष्ट हो गई। मनफूल ने इस नुकसान से उत्पन्न आर्थिक दिक्कतों का वर्णन करते हुए बताया कि उनके पास आजीविका के कोई अन्य साधन नहीं हैं और फसल खराब होने से परिवार की आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है। इस स्थिति से उबरने के लिए वह सरकार से प्रति बीघा 10 बोरी चने के हिसाब से मुआवजा दिलाने की मांग कर रही हैं।
ज्ञापन में मनफूल ने यह भी बताया कि उनकी कटी हुई फसल को गांव के कुछ लोग पिछले एक माह से उठाने नहीं दे रहे हैं। विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं। इस घटना की सूचना उन्होंने पहले से पुलिस थाना सदर नसीराबाद और अजमेर के एसपी को भी दी थी। 7 अप्रैल को पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपियों को पाबंद किया था।
मनफूल ने प्रशासन से आग्रह किया है कि न केवल फसल खराबी का उचित मुआवजा तुरंत प्रदान किया जाए, बल्कि उनके खिलाफ धमकी देने और फसल न उठाने के लिए बने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करके उन्हें सुरक्षा भी मुहैया कराई जाए।
स्थानीय प्रशासन इस मामले की गंभीरता को लेकर फिलहाल मुआवजा प्रक्रिया शुरू करने और किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर काम कर रहा है। इस दौरान क्षेत्र के कई किसान भी लगातार बढ़ रही बारिश से परेशान हैं और वे सरकार से राहत एवं सहायता की उम्मीद लगाए हुए हैं।
यह घटना न केवल एक महिला किसान की जीवन-threatening परिस्थिति को उजागर करती है, बल्कि किसानों की सुरक्षा और मुआवजा नीति पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। उम्मीद है कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग उक्त मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करेंगे, ताकि किसानों को उनकी फसलों के नुकसान का उचित मुआवजा मिल सके और वे आर्थिक संकट से बाहर निकल सकें।
