गाजियाबाद

“लालू यादव जैसी गलती न करें”: महिला आरक्षण बिल पर ललन सिंह ने विपक्ष को दी चेतावनी

नई दिल्ली, भारत

लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल समेत तीन संविधान संशोधन बिलों पर दूसरे दिन भी चर्चा जारी रही। इस दौरान जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने विपक्ष को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध करने वाले उसी गलती को दोहरा रहे हैं, जिसे कभी लालू यादव ने किया था और जिसका खामियाजा वे आज तक भुगत रहे हैं।

ललन सिंह ने कहा, “यह बिल महिलाओं के लिए लाया गया है जो देश की आधी आबादी हैं। इसे जल्दबाजी में नहीं लाया गया है, बल्कि गहन विचार के बाद प्रस्तावित किया गया है। कांग्रेस जैसे कुछ राजनीतिक दल इस सामाजिक बदलाव को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया है कि अगर इसका विरोध किया गया तो उसका खामियाजा लंबा होगा।”

उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उदाहरण से यह बात समझाई कि कैसे महिलाओं को पदों पर आरक्षण दिया गया, लेकिन लालू यादव ने इसका विरोध किया और आज भी वे इसका दुष्परिणाम भुगत रहे हैं। ललन सिंह ने कहा, “आज बिहार की महिलाएं एनडीए के साथ खड़ी हैं क्योंकि उन्होंने महिला सशक्तिकरण को समर्थन दिया है।”

राजीव रंजन ने आगे कहा कि यह बिल मातृत्व शक्ति की भावना को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत किया गया है और इसका विरोध न कर अन्याय न किया जाए। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि हठधर्मिता छोड़कर देशहित में इस बिल का समर्थन करें, अन्यथा उन्हें भी जैसे बिहार में लालू यादव को वर्षों तक भुगतना पड़ा, ऐसा सामना करना पड़ सकता है।

गौरतलब है कि इस बिल पर लोकसभा में आज शाम 4 बजे तक चर्चा चलने की संभावना है, जिसके बाद गृहमंत्री अमित शाह अपने जवाब देंगे और बिल पर मतदान होगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सदस्यों से महिला आरक्षण बिल का समर्थन करने की अपील की है।

यह बिल महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के साथ-साथ सामाजिक न्याय को भी मजबूत करेगा। इसे लागू करने से संसद और सभी सरकारी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे उनके अधिकारों और हितों की बेहतर रक्षा संभव होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण बिल देश में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके समर्थन में आवाजें तेज हैं, लेकिन विरोध भी जारी है, जो इसकी व्यापकता और सामाजिक प्रभाव को दर्शाता है।

इसके अलावा, विपक्ष के कुछ सदस्य असमर्थता जताते हुए कह रहे हैं कि बिल में सुधार की आवश्यकता है और इसे जल्दबाजी में नहीं लाना चाहिए। वहीं, समर्थक कहते हैं कि महिलाएं समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और उनकी भागीदारी को बढ़ाना अनिवार्य है।

अंत में, संसद में व्याप्त राजनीतिक तनाव के बीच यह बिल महिलाओं के अधिकारों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा या नहीं, यह आने वाले समय में देखने को मिलेगा। फिलहाल चर्चा जारी है और मतदान का परिणाम महत्वपूर्ण होगा।

समाचार संपादित द्वारा: नरेन्द्र गुप्ता

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