मसाला फसलों में आगे, अब फूलों की भी होगी पैठ, किसानों की आय बढ़ाने के लिए सीएम डॉ. मोहन का विशेष प्लान
मध्यप्रदेश, भारत
मध्यप्रदेश में मसाला फसलों, गार्डनिंग और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में कई नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिनसे किसानों की आय में सुधार होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 अप्रैल को उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनाओं और फील्ड गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने बताया कि उद्यानिकी फसलें कम स्थान में अधिक आय का ज़रिया बन सकती हैं, जिन्हें प्रदेश के अधिकतर किसानों तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।
डॉ. मोहन यादव ने किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करते हुए प्राकृतिक खाद के उपयोग की अहमियत बताई। उनका कहना था कि सरकार कृषि क्षेत्र में नवाचार और किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मसाला फसलों के उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में शीर्ष स्थान पर है, जिसे और बेहतर बनाने की दिशा में काम जारी रहेगा।
उद्यानिकी फसलों का विस्तार भी योजनाबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि किसानों की आय और खुशहाली सुनिश्चित हो सके। राज्य में औषधीय गुणों से भरपूर कई फसलों की खेती हो रही है, जिनका उपयोग बढ़ती आयुर्वेदिक दवाओं की मांग को पूरा करने में किया जाएगा। प्रदेश में हर साल नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल भी खोले जा रहे हैं, जहां प्रदेश की औषधीय फसलों का ज्यादा उपयोग होगा।
बैठक में सिंहस्थ-2028 की तैयारी के तहत उज्जैन में फूलों की खेती को बढ़ावा देने की भी योजना प्रस्तुत की गई। इसके लिए एक 19 एकड़ में सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर की स्थापना की जा रही है। प्रदेश में मसाला फसलों का उत्पादन 57.72 लाख मीट्रिक टन है, जो देश में सर्वाधिक है। फूलों का उत्पादन प्रदेश में लगभग 4.88 लाख मीट्रिक टन है, जिससे प्रदेश तीसरे स्थान पर है। सब्जी और फल के उत्पादन में भी मध्यप्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल है।
मखाना की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 14 जिलों में उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य के साथ सहायता योजनाएं चलाई जा रही हैं। वर्ष 2024 में मखाना उत्पादन क्षेत्र को 85 हेक्टेयर तक पहुंचाने की योजना है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय अनुदान भी प्रदान किया जाता है।
इसके अलावा, जून में भोपाल में आम महोत्सव, जुलाई में खरगौन में मिर्च महोत्सव, सितंबर में बुरहानपुर में केला महोत्सव, अक्टूबर में इंदौर में सब्जी महोत्सव, और नवंबर में ग्वालियर में अमरूद महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, दिसंबर में मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी।
प्रदेश में 40 नर्सरियों का तकनीकी उन्नयन किया जा रहा है और सूक्ष्म सिंचाई के क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है। धार जिले के बदनावर के निकट रूपाखेड़ा गांव में युवाओं द्वारा फूलों की खेती की खास पहचान बन रही है जो प्रदेश के फूलों की खेती में स्वागत योग्य प्रगति है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे क्षेत्रवार फसलों की पहचान कर किसानों को प्रोत्साहित करें और आधुनिक खेती की तकनीकों व संसाधनों का व्यापक विस्तार सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए योजनाओं का पारदर्शी एवं प्रभावी कार्यान्वयन जरूरी है। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को भी किसानों की आय बढ़ाने तथा रोजगार सृजन में एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया। छोटे स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि स्थानीय स्तर पर उत्पादन को अधिक से अधिक लाभ मिल सके।
सामाजिक न्याय, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा समेत अन्य विभागीय अधिकारी भी इस समीक्षा बैठक में उपस्थित थे। सरकार की प्रतिबद्धता है कि कृषि को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाकर किसानों के जीवन में स्थायी सुधार लाया जाए।




