निर्जला व्रत रखकर महिलाओं ने की अखंड सौभाग्यवती, सर्व मंगल की कामना
बॉंसी कस्बा बॉंसी मे तीजा का पर्व बहुत ही भक्ति भाव से मनाया गया,
इस व्रत को करने में महिलाओं में खासा उत्सव देखा गया,
बॉंसी में जगह जगह तीजा मंडप सजा कर के रात्रि जागरण का दौर चलता रहा ,इस पर्व पर महिलाओं ने अपने घरों में विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए व अपने घर पर तीज मंडप डाल कर रात्रि जागरण के साथ भजन कीर्तन पूजा अर्चना की,
वैदिक ब्राह्मणों के द्वारा पोथी कथा का घर घर रखे तीज मंडपो में वाचन किया गया, इस व्रत में 24 घंटे का निर्जला व्रत किया जाता है इसमें तीज से एक दिन पहले महिलाएं व कन्याएं उपवास रखती हैं, सुहागने अखण्ड स्वभागयवती एवं अपने परिवार की संपन्नता की कामना करती है वही कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना रखती है,
इस पर्व की शुरुआत माता पार्वती ने शिव जी को पति रुप में पाने को कठिन तप निर्जला तीज व्रत किया था, कैसे पड़ा इस व्रत का नाम तीज
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती जी की सखियों ने उनका अपहरण कर जंगल में छिपा दिया था। ताकि माता पार्वती के पिता उनका विवाह इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से न कर सकें। दरअसल, पार्वती जी शिव जी को मन ही मन अपना पति मान चुकी थीं। इसलिए उनकी सखियां उन्हें लेकर घने जंगल में चली गईं, जंगल में एक गुफा के भीतर माता पार्वती ने भगवान शिव की अराधना की और भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में पार्वती जी ने मिट्टी के शिवलिंग बनाकर विधिवत पूजा की। साथ ही रातभर जागरण भी किया। पार्वती जी के तप से भगवान शिव ने खुश होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। इस तरह सखियों द्वारा उनका हरण कर लेने की वजह से इस व्रत का नाम हरतालिका व्रत पड़ गया,
इस वर्ष कस्बे में बहुत जगह तीज मंडप सजाय गय,जिनमें रात से सुबह तक भजन कीर्तन का दौर चलता रहा,