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तहसीलदार के आदेश के बाद भी नहीं हटा कब्जा, आमरण अनशन पर बैठा पीडि़त

 

कुआगांव में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप

ग्राम प्रधान और लेखपाल पर मिलीभगत के गंभीर आरोप

ललितपुर। महरौनी तहसील के ग्राम कुआगांव में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। तहसीलदार न्यायालय द्वारा बेदखली और जुर्माने का आदेश जारी किए जाने के बावजूद कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीण ने जिला प्रशासन को आमरण अनशन की चेतावनी दी है। पीडि़त का आरोप है कि ग्राम प्रधान और लेखपाल की मिलीभगत से गांव सभा की भूमि पर अवैध कब्जे कराए जा रहे हैं। ग्राम कुआगांव निवासी जण्डेल सिंह विश्वकर्मा ने जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में बताया कि गांव की आराजी संख्या 1438, जो ग्राम सभा की बंजर भूमि है, उस पर वीर सिंह द्वारा अवैध रूप से मकान और टीनशेड बनाकर कब्जा किया गया है। इस मामले में तहसीलदार महरौनी न्यायालय में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत मुकदमा चलाया गया था।

तहसीलदार ने दिए थे ध्वस्तीकरण के आदेश

शिकायतकर्ता के अनुसार तहसीलदार न्यायालय ने 20 जनवरी 2024 को आदेश जारी करते हुए अवैध निर्माण हटाने और आरोपी पर 58 हजार 850 रुपये का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि आदेश के दो साल बाद भी न तो अवैध कब्जा हटाया गया और न ही जुर्माने की वसूली की गई।

प्रधान और लेखपाल पर गंभीर आरोप

पीडि़त ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान नेकपाल सिंह और क्षेत्रीय लेखपाल की मिलीभगत से गांव की बंजर, चारागाह और पत्थर वाली जमीनों पर अवैध कब्जे कराए जा रहे हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि ग्राम प्रधान के परिजनों ने आराजी संख्या 1715 और 1714 पर भी कब्जा कर रखा है।

कार्रवाई न होने पर शुरू किया अनशन

जण्डेल सिंह का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर तहसीलदार के आदेश का पालन कर अवैध कब्जा नहीं हटाया गया, जिसके चलते आज वह घंटाघर पर आमरण अनशन शुरू कर दिया है।

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