तमिल नाडु में आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस बीच, तमिल नाडु ड्वॉर्फिज्म एसोसिएशन के सदस्य एक बार फिर से अपनी पुरानी मांगों को लेकर सामने आए हैं। वोटिंग बूथों पर मतदान के दौरान सुविधा और समानता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने विशेष तौर पर स्टूल की उपलब्धता पर जोर दिया है।
ड्वार्फिज्म से ग्रस्त लोगों के लिए चुनावी प्रक्रिया में भाग लेना कई बार कठिनाइयों से भरा होता है। आमतौर पर बूथ पर ऊंचाई के हिसाब से की गई व्यवस्था उनके लिए उपयुक्त नहीं होती, जिससे मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी करना मुश्किल हो जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए इस एसोसिएशन ने चुनाव आयोग से विशेष स्टूल प्रदान करने की मांग की है ताकि वे आराम से और सम्मानपूर्वक वोट दे सकें।
सदस्य बताते हैं कि स्टूल न केवल उनका मतदान को आसान बनाता है, बल्कि यह उनकी गरिमा और सम्मान का भी प्रतीक है। इस छोटे से बदलाव से यह सुनिश्चित होगा कि ड्वार्फिज्म वाले लोग भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बिना किसी बाधा के भाग ले सकें। इसके अलावा, वे चुनाव आयोग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से अनुरोध करते हैं कि उनके साथ संवाद बनाए रखें और उनके सुझावों को प्राथमिकता दें।
तमिल नाडु ड्वॉर्फिज्म एसोसिएशन लंबे समय से इस बात पर जोर देता आ रहा है कि चुनाव केंद्रों पर स्थितियां सभी के लिए समान और सुविधाजनक होनी चाहिए, विशेषकर वे जो शारीरिक रूप से कमजोर या असमर्थता से ग्रस्त हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र का मूल सिद्धांत प्रत्येक व्यक्ति के समान अधिकार और समान भागीदारी में निहित है, और इसे सुनिश्चित करने के लिए चुनावी व्यवस्था में उचित बदलाव अनिवार्य हैं।
सरकार और चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में सकारात्मक कदम उठाने की उम्मीद है, ताकि आगामी चुनावों में कोई भी मतदाता बाधा या असुविधा का सामना न करे। सामाजिक संगठन और नागरिक समूह भी इस दिशा में सक्रिय होते हुए सरकार से संवाद स्थापित करने में मदद कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि निर्वाचन प्रक्रिया में इस मांग को किस हद तक स्वीकार किया जाता है और ड्वार्फिज्म से ग्रस्त मतदाताओं के लिए क्या-क्या सुधार किए जाते हैं।




