मिडिल ईस्ट में बड़ी लड़ाई की तैयारी: अमेरिका का केशम द्वीप पर हमला, ईरान का कुवैत में अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल हमले
नई दिल्ली, भारत – मिडिल ईस्ट क्षेत्र में लगातार बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति को हिला कर रख दिया है। हाल ही में अमेरिका ने केशम द्वीप पर कारवाई की है और ईरान ने इसका जवाब देते हुए कुवैत में अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइलें दाग दी हैं। यह घटनाक्रम क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है।
अमेरिका द्वारा टेलीकॉम एंटीना और ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाए जाने के बाद ईरान ने कुवैत में अमेरिकी एयरबेस और फिफ्थ फ्लीट पर हमले किए। इन हमलों के बाद कुवैत और बहरीन में साइरन की आवाजें गूंजने लगीं, जिससे नागरिकों में चिंता की लहर दौड़ गई है।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने बताया कि कुवैत पर दागी गईं दो मिसाइलें उनके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही गिर गईं या रास्ते में नष्ट हो गईं, जबकि बहरीन पर दागी गई तीन मिसाइलें अमेरिकी और बहरीनी हवाई रक्षा प्रणाली द्वारा रोक ली गईं। इस तरह अमेरिका ने हमलों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपनी आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कुवैत में अमेरिकी सेना पर हमला करने की कोशिश कर रहे ईरानी ड्रोन की एक और लहर भी विफल हो गई। उन्होंने कहा कि हवाई सुरक्षा प्रणाली ने कई ड्रोन मार गिराए और किसी भी अमेरिकी कर्मी या संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
इसी के साथ एक अन्य पोस्ट में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के दावों को खारिज किया जिनमें उन्होंने बहरीन में अमेरिकी 5वें बेड़े के मुख्यालय और एक हवाई अड्डे पर हमला करने का दावा किया था। इस ट्वीट में कहा गया कि ये हमले पूरी तरह से विफल रहे हैं और अमेरिकी सेना पूरी तरह सतर्क है।
अमेरिका की ओर से यह भी बताया गया कि उन्होंने एक खाली तेल टैंकर को निशाना बनाया था, जो ईरान की तरफ जा रहा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी कि एक अमेरिकी विमान ने बोत्सवाना के झंडे वाले एम/टी जहाज के इंजन रूम पर हेल्फायर मिसाइल दागी।
ये सभी घटनाएं मिडिल ईस्ट में सुरक्षा संकट को और गहरा कर रही हैं। भारत समेत कई देशों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है और कहा है कि क्षेत्र में शांति आवश्यक है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है, जिसका असर पूरे क्षेत्रीय और वैश्विक संतुलन पर पड़ता दिख रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक बातचीत ही एकमात्र रास्ता है, वरना इलाके में और बड़े संघर्ष के आसार बढ़ सकते हैं। फिलहाल क्षेत्रीय देशों की नजरें अमेरिका और ईरान के अगले कदमों पर टिकी हैं।
यह घटनाक्रम इस बात का संकेत भी है कि मिडिल ईस्ट में तनाव का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले समय में कई और जटिल क्षण देखने को मिल सकते हैं। वैश्विक समुदाय को इस मामले पर गंभीरता से ध्यान देना होगा ताकि एक बड़े युद्ध को टाला जा सके।
लेखक: नरेन्द्र गुप्ता




