उत्तर प्रदेशक्राइम

राजकुमार पंथ उर्फ छन्नू हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई, मुख्य सरगना राही जैन समेत तीन पर गैंगस्टर एक्ट

 

जिलाधिकारी से अनुमोदित गैंगचार्ट के आधार पर कोतवाली पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

हत्या समेत गंभीर आपराधिक गतिविधियों के आरोप

ललितपुर। चर्चित राजकुमार पंथ उर्फ छन्नू हत्याकांड में कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी एवं कथित गैंगलीडर सम्यक राजनायक उर्फ राही जैन समेत तीन आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाजविरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने गिरोह बनाकर हत्या जैसे गंभीर अपराध को अंजाम दिया और उनके भय एवं आतंक के चलते आम लोगों में असुरक्षा का माहौल बना हुआ था। जिलाधिकारी ललितपुर द्वारा अनुमोदित गैंगचार्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक गैंग में गुरुनानक धर्मशाला के सामने, सिविल लाइन निवासी सम्यक राजनायक उर्फ राही जैन पुत्र राजीव कुमार को गैंगलीडर बताया गया है। इसके अलावा वर्णी कॉलेज के पीछे निवासी गौरव रैकवार पुत्र रामप्रसाद तथा पुराना सूचना केंद्र के पास निवासी गजेन्द्र नरवरिया उर्फ गजेन्द्र सिंह राजपूत पुत्र स्व. सुखदयाल को गिरोह का सक्रिय सदस्य बताया गया है। यह मामला 13 जून 2026 की घटना से जुड़ा है। मृतक राजकुमार पंथ उर्फ छन्नू की मां गजरा पैलेस के पास सिविल लाइन निवासी राधाबाई पत्नी दिनेश पंथ ने घटना के अगले दिन 14 जून 2026 को कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी। तहरीर के अनुसार उनका करीब 25 वर्षीय पुत्र राजकुमार पंथ 13 जून की सुबह करीब 10 बजे घर से निकला था। राजकुमार का सम्यक राजनायक उर्फ राही जैन के यहां आना-जाना बताया गया था। देर रात तक जब राजकुमार घर वापस नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। तलाश के दौरान परिजनों को जानकारी मिली कि राही जैन ने अपने साथियों गौरव रैकवार और गजेन्द्र राजपूत के साथ मिलकर राजकुमार के साथ मारपीट की है। परिजन जब मौके पर पहुंचे तो राजकुमार राही जैन के घर के पास अचेत अवस्था में पड़ा मिला। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस की विवेचना में सामने आए तथ्यों के अनुसार आरोपियों ने राजकुमार के सिर और शरीर पर स्टील की रॉड से ताबड़तोड़ वार किए थे। आरोप है कि गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार घटना के बाद साक्ष्य मिटाने का प्रयास भी किया गया। शव को सीढिय़ों से घसीटकर बाहर फेंकने तथा फर्श पर लगे खून को साफ करने की बात भी विवेचना में सामने आई। मामले में थाना कोतवाली में मु.अ.सं. 662/2026, धारा 103(1) बीएनएस एवं 3(2)वी एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों नामजद आरोपियों को 14 जून 2026 को ही गिरफ्तार कर लिया था। विवेचना के दौरान मामले में धारा 238 बीएनएस की बढ़ोतरी की गई। पुलिस के अनुसार विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद 4 जुलाई 2026 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया था। पुलिस के अनुसार विवेचना एवं उपलब्ध आपराधिक तथ्यों के आधार पर आरोपियों की गतिविधियां संगठित गिरोह के रूप में सामने आईं। पुलिस का आरोप है कि गिरोह के सदस्य भौतिक एवं आर्थिक लाभ अर्जित करने के उद्देश्य से गंभीर अपराध करने के अभ्यस्त हैं। इनके कथित भय और आतंक के कारण आम लोग इनके खिलाफ शिकायत या गवाही देने से डरते हैं। इन्हीं तथ्यों और जिलाधिकारी द्वारा अनुमोदित गैंगचार्ट के आधार पर कोतवाली पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 2/3 के तहत नया मुकदमा दर्ज किया है।

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