जीजा की डिग्री चुराकर डॉक्टर बने दम्पत्ति पर गैंगस्टर
ललितपुर में फर्जी डिग्री और छद्म पहचान से अस्पतालों में इलाज का आरोप
शातिर दम्पती पर गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा
ललितपुर। जिले में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज और छद्म पहचान के सहारे डॉक्टर बनकर चिकित्सा व्यवसाय करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। कोतवाली पुलिस ने संगठित तरीके से फर्जीवाड़ा कर चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय रहे दंपती के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 की धारा 2/3 (गैंगस्टर एक्ट) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने अभिनव सिंह को गिरोह का गैंग लीडर तथा उसकी पत्नी लवीना सिंह को सक्रिय सदस्य के रूप में नामजद किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर फर्जी डिग्री, दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करने, कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर चिकित्सक के रूप में कार्य करने तथा विभिन्न अस्पतालों में मरीजों का उपचार करने सहित कई गंभीर आरोप हैं। मामले में मुख्य आरोपी अभिनव सिंह को पूर्व में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि उसकी पत्नी लवीना सिंह को भी गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। मामले का खुलासा अमेरिका के टेक्सस में रहने वाली डा.सोनाली सिंह की शिकायत के बाद हुआ। उन्होंने स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि उनके इंजीनियर भाई अभिनव सिंह ने उनके पति डा.राजीव गुप्ता की एमबीबीएस और एमडी की डिग्रियों का कथित रूप से दुरुपयोग कर उनकी पहचान अपनाई और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर चिकित्सा क्षेत्र में नौकरी हासिल की। शिकायत के बाद हुई जांच में फर्जीवाड़े से जुड़े कई तथ्य सामने आने की बात पुलिस की ओर से कही गई है। जांच में सामने आया कि अभिनव सिंह ने कथित तौर पर अपने जीजा डा.राजीव गुप्ता की शैक्षणिक योग्यता और पहचान का इस्तेमाल कर स्वयं को चिकित्सक के रूप में प्रस्तुत किया। वहीं उसकी पत्नी लवीना सिंह ने कथित रूप से डा.दीपाली सिंह के नाम से छद्म पहचान बनाकर चिकित्सा व्यवसाय शुरू किया। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने मिलकर बिना वैध चिकित्सकीय योग्यता के चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश किया और लंबे समय तक लोगों का उपचार करते रहे। पुलिस के मुताबिक, अभिनव सिंह ने कथित फर्जी पहचान और दस्तावेजों के आधार पर ललितपुर मेडिकल कॉलेज की जिला सीसीयू एवं कैंसर केयर यूनिट में कार्डियोलॉजिस्ट एवं जनरल मेडिसिन विशेषज्ञ के रूप में संविदा पर नौकरी हासिल की। इसके एवज में उसे करीब 1.50 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन मिलने की बात सामने आई है। आरोप है कि इसके अलावा अभिनव सिंह ने मथुरा, नूह मेवात (हरियाणा), बीना (मध्य प्रदेश) और वृंदावन के विभिन्न अस्पतालों में भी फर्जी डॉक्टर के रूप में काम किया और बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार किया। मामले की जांच में आरोपी अभिनव सिंह पर 32 बोर की पिस्टल का शस्त्र लाइसेंस भी कथित रूप से फर्जी तरीके से हासिल करने का आरोप सामने आया है। पुलिस के अनुसार, उसने अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए मृत रिश्तेदार अथवा कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लेकर शस्त्र लाइसेंस हासिल किया था। इस संबंध में भी पुलिस की ओर से संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी अभिनव सिंह (करीब 57 वर्ष) को पूर्व में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अभिनव सिंह मूल रूप से तालाबपुरा, ललितपुर का निवासी बताया गया है और वर्तमान में उसका पता खुरई, सागर, मध्य प्रदेश बताया गया है। वहीं उसकी पत्नी लवीना सिंह (करीब 56 वर्ष) को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों द्वारा कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों और छद्म पहचान के जरिए किए गए अपराध से अर्जित चल-अचल संपत्ति तथा उनके समाज विरोधी क्रियाकलापों को देखते हुए गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद थाना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अनुराग अवस्थी द्वारा अभिनव सिंह और लवीना सिंह के विरुद्ध उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 की धारा 2/3 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस अब आरोपियों की कथित आपराधिक गतिविधियों, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, विभिन्न अस्पतालों में उनकी भूमिका और अपराध से अर्जित संपत्ति से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।



