पेट्रोल डीजल संकट : क्या देश में बढ़ रहा ईंधन संकट? सरकार ने बताया- देश में कितने दिनों का स्टॉक मौजूद
नई दिल्ली, भारत
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत के समुद्री व्यापार, विशेषकर ऊर्जा क्षेत्र, पर गहरा प्रभाव पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से देश की ईंधन आपूर्ति में व्यवधान आया है, क्योंकि खाड़ी के देशों से भारत का अधिकांश कच्चा तेल आता है। इस स्थिति के बीच पेट्रोल और डीजल की किल्लत को लेकर देश के कई हिस्सों में लंबी कतारें और राशनिंग की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे संसद की एक स्थायी समिति में इस विषय पर तीखी चर्चा हुई।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति को भरोसा दिलाया कि देश के पास अगले 78 दिनों के लिए पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है। इस बैठक में पश्चिम एशिया के समकालीन संकट का समुद्री व्यापार पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से समझा गया। अधिकारियों ने कहा कि सरकार ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।
हालांकि, विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि मंत्रालय ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कमी के संबंध में पर्याप्त आंकड़े साझा नहीं किए। उन्होंने यह भी पूछा कि जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का जल्द समाधान नहीं दिख रहा था, तो सरकार ने पहले से आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए। सांसदों ने महंगे तेल एवं उर्वरकों से आम जनता को बचाने के लिए बेहतर पूर्व तैयारी की आवश्यकता पर बल दिया।
उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों ने भी आश्वासन दिया कि खरीफ बुवाई के लिए देश में खाद की कोई कमी नहीं है और भंडार पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। इस बीच, शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, मार्च माह में 37 भारतीय जहाज पश्चिम एशिया में फंसे हुए थे, जिनमें से 13 जहाज अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण रास्ते में अटके हैं।
इससे यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान वैश्विक राजनीतिक तनाव और उसकी वजह से समुद्री मार्गों में रुकावटें देश के ईंधन और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर रही हैं, परन्तु सरकार इस संकट से निपटने के लिए सतत प्रयासरत है। जनता से भी आग्रह है कि वे स्थिति को समझें और अनावश्यक घबराहट से बचें।




