सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: चुनाव आयोग को SIR कराने का अधिकार, प्रक्रिया गैर-संवैधानिक नहीं
नई दिल्ली, भारत — सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SIR कराना चुनाव आयोग का अधिकार है और यह प्रक्रिया संवैधानिक रूप से वैध है। चुनाव आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर कोई कदम नहीं उठाया है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा कि SIR प्रक्रिया को सिर्फ इस आधार पर “अल्ट्रा वायर्स” (गैर-कानूनी) कहना उचित नहीं होगा क्योंकि यह प्रतिवर्ष होने वाली मतदाता सूची सामान्य पुनरीक्षण से अलग एवं विशेष प्रक्रिया है। अदालत ने इसे आवश्यक और संवैधानिक उपाय बताया जो चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि एसआईआर के दौरान नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है और इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची से किसी को निकालना नहीं है। इससे उम्मीदवारों और मतदाताओं की संख्या में गड़बड़ी पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है। पैनल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को फेयर और वैध बताया।
क्या बोले याचिकाकर्ता?
याचिकाकर्ता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को सही ठहराते हुए इसे चुनाव आयोग का अनिवार्य कार्य बताया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने उन तमाम कमियों और दावों को खारिज कर दिया जो SIR के खिलाफ दायर याचिकाओं में उठाए गए थे। उपाध्याय ने यह भी मांग रखी कि SIR प्रक्रिया नियमित अंतराल यानी हर पांच साल में होनी चाहिए ताकि सूची में घुसपैठियाओं के नाम शामिल न हो सकें।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस फैसले से आने वाले समय में गैरकानूनी रूप से मतदाता सूची में शामिल होने वाले विदेशी नागरिकों का नाम नहीं होगा और चुनाव प्रक्रिया और मजबूत होगी। यह फैसला चुनाव आयोग और सरकार के प्रयासों को बल देगा ताकि प्रत्येक मतदाता मान्य रूप से सूचीबद्ध हो।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को आधार कार्ड को SIR के लिए जरूरी दस्तावेजों में शामिल करने का निर्देश दिया था। हालांकि, आधार कार्ड को किसी नागरिक का प्रमाण नहीं माना गया, बल्कि इसे सत्यापन उपकरण के रूप में उपयोग करने की बात कही गयी। इससे चुनाव आयोग को मतदाता सूची के डिजिटल सत्यापन में मदद मिलेगी।
यह फैसला भारतीय लोकतंत्र की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता सूची सही, पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
संवाददाता: नरेन्द्र गुप्ता




