गाजियाबाद

मैं कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होऊंगा, सोनम वांगचुक ने जारी किया वीडियो

दिल्ली, भारत – केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जुड़ी विवादास्पद घटनाओं और हाल ही में हुए घोटालों को लेकर देश भर में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इस गंभीर स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शैक्षणिक सुधारक सोनम वांगचुक ने 2 जून को एक्स (Twitter) पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने 6 जून को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्यों के साथ एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा की।

वीडियो में वांगचुक ने कहा, “यदि हम नहीं तो कौन? यदि अब नहीं तो कब?” उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर 5 जून तक स्थिति में कोई सकारात्मक बदलाव नहीं आता है, तो वे इस आंदोलन का हिस्सा बनेंगे। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा प्रणाली में हुई गंभीर चूक के चलते किसी भी आत्मसम्मान रखने वाले मंत्री को पद छोड़ देना चाहिए।

यह मुद्दा लाखों छात्रों और युवा पीढ़ी के भविष्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे गंभीरता से लेना आवश्यक है। सीबीएसई में चल रहे विवादों ने छात्रों की पढ़ाई, परिणामों की जांच और प्रमाणीकरण प्रक्रिया पर गहरा असर डाला है, जिससे पूरे देश के शैक्षिक माहौल में तनाव व्याप्त हो गया है।

सोनम वांगचुक ने कहा, “हमने नई शिक्षा नीति और विकसित भारत अभियान जैसी कई अच्छी योजनाएं देखी हैं, लेकिन उनका व्यावहारिक क्रियान्वयन न होना चिंताजनक है। अगर स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति ऐसी ही रही, तो भारत 2047 तक अपने विकास के लक्ष्यों को कैसे प्राप्त करेगा?”

इसके अलावा उन्होंने कहा कि शिक्षा में न्याय और पारदर्शिता की आवश्यकता है, और वे चाहते हैं कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद की पूरी जांच हो और दोषियों को सजा मिले। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच के लिए गठित तंत्र की सराहना की लेकिन साथ ही बदलाव के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

वांगचुक के इस बयान ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षाविदों में एक बार फिर चर्चा को जन्म दिया है कि देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार कितना जरूरी है। उनके इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देगा और जल्द से जल्द समाधान निकालेगा।

इस मामले में लोकांडे प्रशांत सीताराम को नए चेयरपर्सन के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि वरुण भारद्वाज को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही पूरी प्रणाली की जांच के लिए एक विशेष समिति भी गठित की गई है ताकि समस्याओं और विसंगतियों का निराकरण किया जा सके।

यह विवाद केवल एक बोर्ड परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह लाखों युवाओं के जीवन और राष्ट्र के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में समाज के हर वर्ग से समर्थन और सक्रिय भागीदारी की जरूरत है। सोनम वांगचुक का यह आंदोलन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समाज के लिए शिक्षा सबसे बड़ा आधार है और इसकी गुणवत्ता में गिरावट सीधे तौर पर देश की प्रगति में बाधा बनती है। इसीलिए वांगचुक ने न केवल प्रदर्शन का आह्वान किया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था सुधार के लिए हर संभव प्रयास करने की भी अपील की है।

सोनम वांगचुक के इस फैसले पर राजनीति और शिक्षा क्षेत्र में भी चर्चा तेज हो गई है, और अगले कुछ दिनों में स्थिति के अनुसार आगे के कदमों पर नजर रखी जा रही है। 6 जून को दिल्ली में होने वाले विरोध प्रदर्शन को कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से भी व्यापक समर्थन मिलने की संभावना है।

यह आंदोलन केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि देश के हजारों छात्रों की आवाज भी प्रतीत होता है जो न्यायपूर्ण शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। इस संघर्ष में सफल होने के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा और सकारात्मक बदलाव के लिए साथ आना होगा।

संपादक: सुधीर शर्मा

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