दुकान खुलवाने के नाम पर दो लाख रुपये लेने का आरोप
वापस मांगने पर धमकी देने की शिकायत
चंद्रशेखर दुबे ने कोतवाली पुलिस को दिया शिकायती प्रार्थना पत्र
आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की मांग
ललितपुर। थाना कोतवाली क्षेत्र के चौबयाना निवासी चंद्रशेखर दुबे पुत्र स्व.रामकिशन दुबे ने कटरा बाजार की जड़ीबूटी लाइन में किराने की दुकान संचालित करने वाले दीपक जैन व उसके भाई संजू जैन के खिलाफ धोखाधड़ी कर दो लाख रुपये लेने तथा रकम वापस मांगने पर अभद्रता और धमकी देने का आरोप लगाया है। पीडि़त ने थाना प्रभारी निरीक्षक कोतवाली को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। चंद्रशेखर दुबे ने बताया कि दीपक जैन का उसके घर आना-जाना था और वह उसके परिवार से परिचित था। आरोप है कि दीपक जैन ने नई दुकान खुलवाने के नाम पर उससे और उसकी मां श्रीमती कुसुमलता दुबे से अलग-अलग तिथियों में कुल दो लाख रुपये लिए। 20 फरवरी 2026 को एक लाख रुपये, 21 फरवरी को 50 हजार रुपये तथा 22 फरवरी को 30 हजार रुपये उसकी मां से घर आकर लिए गए। इसके अतिरिक्त 20 हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से दिए गए। आरोप है कि रकम लेते समय अप्रैल माह के आसपास पैसा सुरक्षित वापस करने का आश्वासन दिया गया था। आरोप है कि जब उसने और उसकी मां ने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपी लगातार टालमटोल करते रहे। बाद में कथित तौर पर रुपये लौटाने से साफ इनकार कर दिया गया। पीडि़त ने आरोप लगाया कि रकम का तकादा करने पर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और जान से मारने की धमकी भी दी गई। चंद्रशेखर दुबे ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि दीपक जैन ने अन्य लोगों से भी इसी प्रकार रुपये लिए हैं तथा उसके भाई संजू जैन को कहीं बाहर भेज दिया गया है। इन घटनाओं के चलते उसका परिवार मानसिक रूप से परेशान है। इस मामले को लेकर उसकी मां कुसुमलता दुबे की ओर से 19 अगस्त 2026 को भी प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस द्वारा बुलाए जाने के बावजूद दीपक जैन ने कथित रूप से पुलिस के सामने भी अभद्र व्यवहार किया और रकम वापस करने से इनकार किया। चंद्रशेखर दुबे ने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने, आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने तथा उसकी और उसकी मां की रकम वापस दिलाने की मांग की है। मामले में पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



