लखनऊ में बुलडोजर कार्रवाई पर बढ़ा विवाद, पुलिस लाठीचार्ज का वकील विरोध, क्या वकीलों को बांटी गईं लाठियां
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: राजधानी लखनऊ में वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर कार्रवाई से उत्पन्न विवाद दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस और वकीलों के बीच तनाव बढ़ गया है, खासकर जब पुलिस ने लाठीचार्ज कर कई वकीलों को घायल कर दिया। इस घटना ने प्रशासन और बार एसोसिएशन के बीच सख्त टकराव को जन्म दिया है।
हादसे के बाद वकीलों ने पुलिस की इस कार्रवाई का कड़ाई से विरोध किया है। कई वकील घायल हुए हैं और उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। हालांकि प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं बार एसोसिएशन पर यह आरोप भी लगा है कि उसने वकीलों को सुरक्षा के नाम पर लगभग 600 लाठियां बांटी हैं, जो विवाद को और भी बढ़ा रहा है।
मामला तब गंभीर हुआ जब प्रशासन ने अवैध माने गए वकीलों के चैंबरों को गिराने के लिए बुलडोजर चलाया। इस दौरान सैंकड़ों वकील मौके पर जमा हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस जब उन्हें हटाने की कोशिश करने लगी तो दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। वकील दावा कर रहे हैं कि जिन चैंबरों को गिराने का आदेश नहीं था, वो भी गिरा दिए गए, जबकि उच्च न्यायालय द्वारा गिराए जाने के लिए कुल 72 चैंबरों की पहचान की गई थी। इसके साथ ही वकालत करने वालों को उचित वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं दी गई।
बार एसोसिएशन के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम से न्यायालयों की कार्यवाही भी प्रभावित हुई है। वकील इस कार्रवाई को उनके सम्मान और पेशेवर अधिकारों पर हमला मान रहे हैं। इस विरोध स्वरूप, उन्होंने 26 मई 2026 तक हड़ताल पर जाने की आधिकारिक घोषणा की है।
जिला न्यायालयों में कार्य प्रभावित होने के कारण आम जनता भी दिक्कतों का सामना कर रही है। वकीलों ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए, आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से इस मामले के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने की अपील की है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रशासन और बार एसोसिएशन के बीच लड़ाई जारी है, जो जल्द ही किसी समाधान की दिशा में जाएगी या नहीं, यह देखना बाकी है। इस विवाद की वजह से लखनऊ के न्यायिक वातावरण में अस्थिरता गहराई है और इससे निपटने के लिए तत्काल सतत संवाद और संयम की आवश्यकता है।
लेखक: चेतन गौर




