गाजियाबाद

डोनाल्ड ट्रंप: क्या ईरान से समझौता कर पाएंगे डोनाल्ड ट्रंप? बराक ओबामा क्यों हुए याद

वॉशिंगटन, अमेरिका – अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ होने वाले संभावित समझौते को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि यह समझौता ‘बेहतरीन और सार्थक’ होगा, लेकिन इसके लिए ईरान को अमेरिका की शर्तों पर संतुष्ट होना होगा। ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के 2015 में हुए परमाणु समझौते को ‘तेहरान को परमाणु हथियार बनाने का खुला मार्ग’ बताया और इसकी कड़ी आलोचना की।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा है कि ईरान के साथ या तो बहुत उपयोगी और सकारात्मक समझौता होगा या कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता ओबामा प्रशासन द्वारा किए गए JCPOA नामक समझौते से पूरी तरह अलग होगा, जिसे वह विनाशकारी बताते हैं। साथ ही, उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी पर भी तंज कसा और उन्हें ‘डेमोक्रेट्स’, ‘RINOS’ (रिपब्लिकन इन नाम ओन्क्रेमेंट्स) और ‘फूल्स’ कहकर संबोधित किया। ट्रंप का कहना था कि डेमोक्रेट्स ने गलत नीतियों और खराब उम्मीदवारों का समर्थन कर देश में विभाजन और समस्याएँ बढ़ाईं।

हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी कायम है। 28 फरवरी से शुरू हुई टकराव के बाद युद्धविराम और शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन ईरान का परमाणु कार्यक्रम दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद बना हुआ है।

ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांति और नागरिक उपयोग के लिए है, जबकि अमेरिका इसे परमाणु हथियार विकसित करने का प्रयास मानता है। इजरायल भी अमेरिका के समर्थन में यह मांग करता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को छोड़ दे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान शांति समझौते की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं और युद्धविराम अवधि को दो महीने बढ़ाने पर चर्चा चल रही है। यह समझौता होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और अमेरिका में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने का रास्ता खोल सकता है।

अभी यह देखना बाकी है कि दोनों देशों के बीच बातचीत कब निर्णायक मोड़ लेकर आती है और क्या वह शांति समझौता हुआ तो इससे क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ेगी या नहीं। इस बीच ट्रंप का तेवर कड़ा है और वे ईरान पर अपनी शर्तों को लेकर अडिग दिखाई देते हैं।

Edited by : Sudhir Sharma

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