डोनाल्ड ट्रंप: क्या ईरान से समझौता कर पाएंगे ट्रंप, बराक ओबामा क्यों हुए याद
वॉशिंगटन, यूएसए
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। ट्रंप ने इसे ‘बेहतरीन और सार्थक’ समझौते के रूप में देखा, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ईरान उनकी बैठकों में तय की गई शर्तों पर सहमति नहीं करता है तो कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के 2015 में किए गए ईरान परमाणु समझौते ‘जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA)’ की भी जमकर आलोचना की, इसे तेहरान को परमाणु हथियार बनाने के लिए खुला रास्ता बताया।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “ईरान के साथ समझौता या तो बहुत शानदार और सार्थक होगा, या फिर कोई समझौता नहीं होगा। यह वह विनाशकारी समझौता नहीं होगा जो ओबामा प्रशासन ने JCPOA के तहत किया था।” उन्होंने अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी पर भी तीखा हमला किया और उन्हें ‘डमोक्रेट्स’, ‘RINOS’ और ‘फूल्स’ कहकर संबोधित किया। ट्रंप का मानना है कि डेमोक्रेट्स गलत नीतियों और खराब उम्मीदवारों के समर्थन के चलते देश में निरंतर विभाजन और क्षति फैला रहे हैं।
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बरकरार है। दोनों देशों के बीच फरवरी 2026 से शुरू हुए संघर्ष के बाद अब युद्धविराम और शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
ईरान का कहना है कि उनका परमाणु कार्यक्रम केवल शांति और नागरिक उपयोग के लिए है जबकि अमेरिका पर आरोप है कि तेहरान इस तकनीक का इस्तेमाल परमाणु हथियार विकसित करने के लिए कर रहा है। इस मामले में इजरायल ने भी अमेरिका का साथ दिया है और ईरान से उच्च संवर्धित यूरेनियम छोड़ने की मांग की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान शांति समझौते की दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम को दो महीने और बढ़ाने पर भी चर्चा हो रही है। इस समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन की अनुमति, ईरान पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, और अमेरिका में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को बहाल करने का रास्ता साफ हो सकता है।
अभी यह देखना बाकी है कि दोनों देशों के बीच यह वार्ता कब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती है और क्या यह विवाद सुलझ पाएगा। फिलहाल स्थिति नाजुक बनी हुई है और दुनिया इस अहम मुद्दे पर नज़र बनाए हुए है।
संपादित: सुदीप शर्मा




