‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान का शुभारंभ, सीएम डॉ. मोहन यादव का पर्यावरण संरक्षण पर जोर
भोपाल, मध्यप्रदेश – विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में राज्य स्तरीय समारोह “एक पेड़ मां के नाम 2.0” का भव्य शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और सर्कुलर इकॉनॉमी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत सीएम ने सर्कुलर इकॉनॉमी से संबंधित पांच कोर्स मॉड्यूल्स का भी विमोचन किया, जिन्हें एप्को और इन्टैक द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत तैयार किया गया है। इस अभियान में प्रदेश के 16 जिलों की 500 बावड़ियों के संरक्षण और संधारण का कार्य शामिल है। इसके अलावा, सीएम ने एक प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया जिसमें पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचार और जल संरक्षण के क्षेत्र में की गई महत्वपूर्ण उपलब्धियों को दर्शाया गया।
राज्यपाल ने इस मौके पर आठ श्रेणियों में पर्यावरण पुरस्कार वितरित किए, जो 2024-25 के लिए प्रदूषण नियंत्रण, सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाली औद्योगिक इकाइयों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों तथा व्यक्तियों को प्रदान किए गए। यह सम्मान प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और योगदान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दिया जाता है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के सफल कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उनका विजन ही है जिसने पर्यावरण संरक्षण को देश की प्राथमिकता बनाया। उन्होंने कहा, “हमारी सनातन संस्कृति में पर्यावरण की महत्ता सदियों से निहित है। हमारे जीवन का हर तरीका प्रकृति के संरक्षण पर आधारित है।” उन्होंने वेदों के उस श्लोक ‘यत पिंडे तत ब्रह्मांडे’ का भी उल्लेख किया, जो परमात्मा के समग्र रूप में प्रकृति की उपस्थिति को दर्शाता है।
सीएम ने बताया कि तुलसी का पौधा हमारे धार्मिक अनुष्ठानों का अभिन्न हिस्सा है और वैज्ञानिक शोधों से भी यह सिद्ध हो चुका है कि पौधों में जीवन होता है। उन्होंने भारत के महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु के उदाहरण से इस बात की पुष्टि की, जिन्होंने पौधों में प्राण होने का सत्य इंग्लैंड में सिद्ध किया था। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक जीवनशैली में प्रकृति का सम्मान और संरक्षण सदैव प्राथमिक स्थान पर रहा है।
जल संरक्षण की दिशा में भी मध्यप्रदेश सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। जल गंगा संवर्धन योजना के तहत नदियों, कुओं, बावड़ियों और तालाबों का संरक्षण बड़े स्तर पर किया जा रहा है, जो पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को देश के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि उन्होंने भारत को विश्व मंच पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण भारत आतंकवाद और नक्सलवाद से भी काफी हद तक मुक्त हुआ है। विज्ञान, तकनीकी, खेल और अन्य क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियां दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं, जिनके लिए प्रधानमंत्री निरंतर प्रोत्साहन देते रहे हैं।
डॉ. यादव ने भोपाल गैस त्रासदी के 40 वर्ष बाद भी इसकी भरपाई करने और प्रभावितों को न्याय दिलाने के लिए किए गए प्रयासों की भी सराहना की। राज्य सरकार ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में पड़े अवशिष्ट कचरे का सफलतापूर्वक निपटान किया और उस काला कलंक को मिटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश में 62 मेगावाट की क्षमता वाली सौर, पवन, बायोमास और जल विद्युत परियोजनाएं तेजी से विकसित की जा रही हैं। खजुराहो समेत अन्य क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट्स चलाए जा रहे हैं। वन्य जीव संरक्षण के तहत चीतों का पुनर्वास और असम से जंगली भैंसों को लाने जैसे प्रयास किए जा रहे हैं, जो प्रदेश को जैविक विविधता में समृद्ध बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने संविधान में निहित सभी प्राणियों और प्राकृतिक तत्वों के साथ सहअस्तित्व की भावना को भी बल दिया तथा भगवान श्रीकृष्ण के कालिया नाग मर्दन की कथा को उद्धृत करते हुए बताया कि पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और सूर्य सभी पर समान अधिकार हमारी सभ्यता की नींव हैं।
यह कार्यक्रम पर्यावरण के प्रति जनता और संस्थाओं की जिम्मेदारी महसूस कराने के साथ-साथ शासन द्वारा जारी पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण अभियानों को गति देने का भी परिचायक है। मध्यप्रदेश की यह पहल न केवल राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण जागरूकता फैलाने में एक मिसाल बनेगी।
लेखक: सुधीर शर्मा




