एक साथ उठीं दो और अर्थियां, नम हुईं हजारों आंखें, पति बृजभूषण का शव देख वेशुद्व हुई पत्नी
हादसे में मृत हुए बृजभूषण व दीपक का हुआ अंतिम संस्कार,
अंतिम संस्कार में पहुंचे राज्यमंत्री सहित हजारों लोग
ललितपुर। जिले के कस्बा महरौनी में मंगलवार को उस समय भावुक माहौल हो गया, जब बानपुर मार्ग स्थित बेदपुर मुक्तिधाम पर सड़क हादसे में मृत बृजभूषण तिवारी और दीपक तिवारी उर्फ शिवानंद का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। दोनों की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा और हर आंख नम नजर आई।
गौरतलब है कि अयोध्या से मूर्ति विसर्जन कर लौट रहे एक ही मोहल्ले के 10 लोग कार में सवार थे, जिनकी जालौन जिले के कालपी क्षेत्र में हाईवे पर ट्रक से टक्कर हो गई थी। इस भीषण हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से छह का अंतिम संस्कार सोमवार देर शाम कर दिया गया था, जबकि बृजभूषण और दीपक के शव मंगलवार सुबह महरौनी पहुंचे, जिसके बाद दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकाली गई।
जैसे ही घर पर बृजभूषण तिवारी का शव अर्थी पर रखा गया, उनकी पत्नी और बेटी बेहोश हो गईं। वहीं दीपक तिवारी के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम संस्कार में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए और शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधाया।
इस दौरान प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। राज्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घटना से अवगत कराते हुए पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद दिलाने की मांग की है।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
बृजभूषण तिवारी तीन भाइयों और एक बहन में दूसरे नंबर पर थे। वह खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में तीन पुत्रियां हैं, जिनमें बड़ी बेटी वैष्णवी ने इस वर्ष इंटरमीडिएट में जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया है, जबकि दूसरी बेटी दिव्यांग है, जिसका इलाज चल रहा था।
वहीं दीपक तिवारी उर्फ प्रदीप दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे थे। वह कोचिंग पढ़ाकर परिवार का गुजारा करते थे। उनकी असामयिक मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है।
अयोध्या से मूर्ति विसर्जन कर लौटते समय हुआ हादसा
कस्बा महरौनी के मोहल्ला खरवांचपुरा में बगियावाले हनुमान जी मंदिर के पास स्थित श्री श्री 1008 श्री राम-जानकी मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है। यह मंदिर तिवारी परिवार का पुश्तैनी मंदिर है, जिसकी पूजा-अर्चना और देखरेख परशुराम तिवारी लंबे समय से करते आ रहे हैं। करीब दो वर्ष पूर्व मंदिर में भगवान रामचंद्र की प्रतिमा खंडित हो गई थी, जिसके बाद नई प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा का निर्णय लिया गया। तिवारी परिवार जबलपुर से भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता जानकी की नई प्रतिमाएं लेकर आया।
25 अप्रैल से सहस्त्रधारा (हजारा) अभिषेक कार्यक्रम शुरू हुआ, 28 अप्रैल को भव्य कलश यात्रा निकाली गई और 30 अप्रैल को प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत भंडारे का आयोजन किया गया। इसके बाद 2 मई को खंडित मूर्तियों के विसर्जन के लिए 10 लोग अयोध्या रवाना हुए। 3 मई को सरयू नदी में विसर्जन करने के बाद सभी वापस लौट रहे थे, तभी 4 मई की सुबह कालपी में यह भीषण हादसा हो गया।
हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई , दुर्घटना में मृत हुए मनोज भोड़ेले पुत्र ओमप्रकाश भोड़ेले (40 ) मंदिरों में पूजा व कथा वाचक का कार्य करते थे ,वह परिवार में इकलौते है, उनके एक पुत्र व एक पुत्री है । मृतक उमेश तिवारी बेरोजगार था ,उसकी शादी नहीं हुई थी , दो भाइयों में सबसे छोटा था । राम जानकी मंदिर के पास निवासी देशराज नामदेव इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान खोले हुआ था, वह 8 भाइयों में 6 नम्बर का था । मृतक कृष्णकांत तिवारी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में संविदा पर टीचर था और वह इकलौता पुत्र था ,उसकी दो पुत्रियां है । मृतक शशिकांत तिवारी एक निजी मारुति शो रुम पर सेल्समैन का काम करते थे, वह चार भाइयों में बड़े थे, उनके एक पुत्र एक पुत्री है । वहीं मृतक स्वामी प्रसाद तिवारी प्राइवेट स्कूल में शिक्षक थे, उनके तीन पुत्र दो पुत्रियां है । मृतक बृज भूषण तिवारी किसान थे और दीपक तिवारी प्राइवेट शिक्षक था,वह कोचिंग पढ़ाता था ।




