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नाबालिग से छेडख़ानी मामले में पॉक्सो कोर्ट का सख्त आदेश

 

जखौरा पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश

विशेष न्यायाधीश नवनीत कुमार भारती ने पुलिस रिपोर्ट खारिज कर कहा, विवेचना से ही सामने आएंगे साक्ष्य

ललितपुर। थाना जखौरा क्षेत्र में नाबालिग बालिका से कथित छेडख़ानी और विरोध करने पर परिवार को धमकाने के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए थाना जखौरा पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नवनीत कुमार भारती ने विविध वाद संख्या 138/2026 में सुनाया। अदालत में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के अनुसार अधिवक्ता सुदेश नायक ने बताया कि बीती 25 मार्च 2026 की शाम करीब 6 बजे थाना जखौरा क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति अपनी नाबालिग पुत्री के साथ खेत से बकरियां लेकर घर लौट रही थीं। आरोप है कि रास्ते में गांव के ही सन्नी और गोटीराम ने शराब के नशे में नाबालिग बालिका के साथ अश्लील हरकतें करते हुए पकड़ लिया और छेडख़ानी की। विरोध करने पर आरोपियों ने मां-बेटी को गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। शोर सुनकर लोग जुटने लगे तो आरोपी मौके से भाग गए। पीडि़त पक्ष ने अदालत को बताया कि घटना की शिकायत थाना जखौरा और बाद में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी की गई, लेकिन पुलिस ने गंभीर धाराओं में कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों के खिलाफ केवल निरोधात्मक कार्रवाई कर मामला शांत करने का प्रयास किया। इसके बाद आरोपियों और उनके परिजनों द्वारा लगातार धमकियां देने का आरोप भी लगाया गया। सुनवाई के दौरान थाना जखौरा पुलिस ने अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश कर मामले को पड़ोसियों के बीच पुराने विवाद और होम थिएटर पर तेज आवाज में संगीत बजाने से उपजा विवाद बताया तथा छेडख़ानी के आरोपों की पुष्टि न होने की बात कही। हालांकि न्यायालय ने पत्रावली, पुलिस अधीक्षक को भेजे गए प्रार्थना पत्र और डाक रसीद समेत उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद माना कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध परिलक्षित होता है। न्यायाधीश नवनीत कुमार भारती ने अपने आदेश में कहा कि मामले में साक्ष्य जुटाने के लिए विधिवत पुलिस विवेचना आवश्यक है। अदालत ने थाना जखौरा के प्रभारी निरीक्षक को निर्देशित किया है कि आरोपियों के विरुद्ध अविलंब सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना कराई जाए तथा दर्ज एफआईआर की प्रति तत्काल न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। यह आदेश 12 मई 2026 को पारित किया गया।

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