ललितपुर जिला न्यायालय में रिमांड ऑर्डर फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा दो अधिवक्ताओं, पांच न्यायालय कर्मचारियों सहित आठ लोगों पर एफआईआर दर्ज
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई
रिमांड आदेश में कथित कूटरचना कर फर्जी प्रमाणित नकल के जरिए हाईकोर्ट को गुमराह करने का आरोप
ललितपुर। जनपद न्यायालय में न्यायिक अभिलेखों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का एक गंभीर मामला सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला न्यायालय के प्रशासनिक लिपिक जितेन्द्र शर्मा की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने दो अधिवक्ताओं, पांच न्यायालय कर्मचारियों तथा एक अभियुक्त सहित कुल आठ लोगों के विरुद्ध बीएनएस एवं आईटी एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि रिमांड आदेश में कूटरचना कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और बिना मूल अभिलेख के प्रमाणित प्रतिलिपि जारी कर उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया गया। थाना तालबेहट के अपराध संख्या 06/2026 के अभियुक्त जितेन्द्र सिंह निरंजन की ओर से अधिवक्ता अनुपम वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका संख्या- 553/2026 दाखिल की थी। याचिका के साथ रिमांड मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर के बिना तैयार कथित रिमांड शीट एवं अभिरक्षा वारंट की प्रतियां संलग्न की गई थीं। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जिला जज ललितपुर से जांच रिपोर्ट मांगी। जांच में कथित रूप से न्यायालय के रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा नियमों के विपरीत प्रमाणित प्रतिलिपि जारी किए जाने की पुष्टि होने पर उच्च न्यायालय ने संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने तथा विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए। प्राथमिकी के अनुसार, 3 मई 2026 को अवकाशकालीन रिमांड मजिस्ट्रेट ने अभियुक्त को 8 मई 2026 तक न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया था। आरोप है कि कोर्ट मुहर्रिर पंकज ने मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर के बिना एक प्रोफार्मा अभिरक्षा वारंट तैयार किया, जिसमें रिमांड अवधि 16 मई 2026 अंकित कर दी गई। आरोप है कि अधिवक्ता अनुपम वर्मा ने उस दस्तावेज की मोबाइल से फोटो ले ली। इसके बाद उनके जूनियर अधिवक्ता अखिलेश राय ने प्रतिलिपि अनुभाग में आवेदन कर बिना मूल अभिलेख मंगाए तथा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना उसी मोबाइल स्कैन कॉपी के आधार पर प्रमाणित नकल जारी करवा ली। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में न्यायालय के कुछ कर्मचारियों ने भी कथित रूप से सहयोग किया और बाद में उसी दस्तावेज को इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया गया। इस प्रकरण में नामजद उन्नाव जिले के पोस्ट अशोहा ग्राम भऊमऊ निवासी अधिवक्ता अनुपम वर्मा पुत्र जगत नारायण वर्मा, जूनियर अधिवक्ता अखिलेश राय, जिला जालौन के थाना सिरसाकलार ग्राम नगरी निवासी जितेन्द्र सिंह निरंजन पुत्र रतन सिंह, ललितपुर निवासी प्रधान प्रतिलिपिक मनोज जोशी पुत्र गोपीलाल जोशी, सहायक प्रतिलिपिक भूपेन्द्र साहू पुत्र जगदीश, कोर्ट मुहर्रिर पंकज, कोर्ट मुहर्रिर उमेश के खिलाफ पुलिस ने बीएनएस की धारा 61(2), 229, 316(5), 337, 338, 340(2) एवं आईटी एक्ट की धारा 66 एवं 66 डी के तहत मामला दर्ज किया है।
इनका कहना है…..
प्राथमिकी संख्या 796/26 जो कि साजिश के तहत मेरे विरुद्ध दर्ज की गई, उसमें जो भी प्रपत्र मुझे प्राप्त हुये थे वह रिमांड मजिस्ट्रेट के आदेश से प्राप्त कराये गये थे। जांच में मुझे नहीं सुना गया और न ही वर्तमान प्रकरण में प्राथमिकी 215 बीएनएसएस की धारा के प्रावधानों के तहत पंजीकृत हो सकती है, जैसा कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा विधि व्यवस्था प्रतिपादित की गई है। इन तथ्यों को माननीय जनपद न्यायाधीश महोदय को प्राथमिकी दर्ज होने से पहले मेरे द्वारा लिखित में सूचित किया जा चुका है।
कैप्टन अनुपम वर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता, हाईकोर्ट प्रयागराज




