पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच ननमन्गलम झील का पुनर्जीवन समाजिक प्रयासों से
चेन्नई, तमिलनाडु – ननमन्गलम क्षेत्र में स्थित झील और अभयारण्य के समीप स्थित जंगल, प्रकृति की एक अनूठी छवि प्रस्तुत करते हैं। हालांकि इन प्राकृतिक संसाधनों को कूड़ादान और सीवेज के प्रवाह के कारण नुकसान पहुंचा है, फिर भी समाज के सक्रिय योगदान से यहाँ के पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार देखने को मिल रहा है।
इस क्षेत्र में झील और रिजर्व फॉरेस्ट की निकटता के कारण जैव विविधता समृद्ध है। मगर, पिछले कुछ वर्षों में बढ़ती मानव गतिविधियां और कूड़े के अतिक्रमण ने इस नैसर्गिक सौंदर्य और जीव-जंतुओं के आवास को प्रभावित किया। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने मिलकर इस स्थिति को सुधारने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (२२ मई) के अवसर पर ननमन्गलम की पारिस्थितिकी स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया। यहाँ की झील में प्रदूषण नियंत्रण एवं सफाई अभियान चलाए गए हैं। साथ ही, सामाजिक जागरुकता बढ़ाने के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहाँ स्थानीय निवासियों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व की जानकारी दी गई।
स्थानीय प्रशासन ने भी कूड़ा प्रबंधन और सीवेज निपटान के नवीनीकृत नियम लागू किए हैं, जिससे झील में प्रदूषित जल के प्रवाह को कम किया जा सके। इसके अतिरिक्त, वन विभाग ने रिजर्व फॉरेस्ट की निगरानी और संरक्षण के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं।
नैसर्गिक आवासों की सुरक्षा के कारण यहाँ पक्षियों और अन्य जीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। स्थानीय पक्षी प्रेमी विद्वानों का कहना है कि जैव विविधता में यह सुधार स्थिरता का संकेत है।
इससे साफ सिद्ध होता है कि जब समाज मिलकर प्रयास करता है तो पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान संभव है। ननमन्गलम झील के पुनर्जीवन में हुए ये व्यापक प्रयास न केवल क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित करेंगे बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करेंगे।




