राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के रणनीति ने कांग्रेस को किया घेरा, तीसरे उम्मीदवार की एंट्री से बढ़ा क्रॉस वोटिंग का खतरा
भोपाल, मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल हाईवोल्टेज हो गया है। बीजेपी की रणनीति में तीसरे उम्मीदवार के तौर पर महेश केवट के नाम की घोषणा ने कांग्रेस के लिए नए राजनीतिक समीकरण पैदा कर दिए हैं। कांग्रेस के टिकट पर मीनाक्षी नटराजन के मुकाबले बीजेपी ने महेश केवट को मैदान में उतारकर चुनावी गणित को काफी जटिल बना दिया है। इस कदम से कांग्रेस के भीतर मतभेद एवं विधायकों की संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका ने दोनों दलों की रणनीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्यसभा चुनाव में बीजेपी की अपनी दो सीटें पक्की माना जा रहा था जबकि कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना थी। लेकिन तीसरे और महत्वपूर्ण उम्मीदवार के रूप में महेश केवट के नामांकन ने इस समीकरण में बड़ा बदलाव ला दिया है। विधानसभा में वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए, बीजेपी को तीसरी सीट पर जीत हासिल करने के लिए कम से कम आठ कांग्रेस विधायकों का समर्थन चाहिए होगा, जो कि कांग्रेस के लिए एक बड़ा संकट का संकेत है।
बीजेपी ने अपने इस दांव से स्पष्ट संदेश दिया है कि वह कांग्रेस के विधायकों के भीतर मतभेदों का पूरा फायदा उठाना चाहती है। इस रणनीति ने कांग्रेस नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है क्योंकि पार्टी के कई बड़े और दिग्गज नेता मीनाक्षी नटराजन के चयन से असहमत हैं। खासकर कमलनाथ और उनकी टीम की नाराजगी अब खुलकर सामने आ रही है, जो कि चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकती है।
कांग्रेस के भीतर असंतोष के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने कहा है कि सभी विधायक एकजुट हैं और मीनाक्षी नटराजन की जीत सुनिश्चित होगी। मीनाक्षी ने भी इस लड़ाई को विचारधारा की लड़ाई बताया और पूरे पार्टी माहौल में एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया। वहीं बीजेपी ने महेश केवट के जीतने की उम्मीद जताई है और इसे मोदी सरकार को मजबूत बनाने के लिए आम जनता की इच्छा बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ एक सीट जीतने का मामला नहीं है, बल्कि यह भविष्य के राजनीतिक समीकरणों का भी परीक्षण होगा। यदि बीजेपी को तीसरी सीट मिलती है, तो यह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सियासी क्षमता की जीत होगी। वहीं कांग्रेस के लिए यह अपनी पार्टी को एकजुट रखने की मुसीबत भी बन सकती है।
इस चुनाव के परिणाम से 2028 के विधानसभा चुनाव में भी बड़े राजनीतिक प्रभाव पड़ने की संभावना है। इसलिए दोनों दल इस विधानसभा चुनाव को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं और अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं।




