नोएडा

ममता बनर्जी को दिल्ली में बड़ा झटका, राज्यसभा सांसद का इस्तीफा और पार्टी से अलगाव

दिल्ली, भारत – पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की हार के बाद पार्टी को दिल्ली में भी बड़ा झटका लगा है। टीएमसी के राज्यसभा सांसद शुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है और साथ ही उन्होंने पार्टी से भी अपना रिश्ता खत्म कर दिया है। शेखर रॉय ने पार्टी में फैले भ्रष्टाचार को ही अपना इस्तीफा देने की मुख्य वजह बताया है।

शुखेंदु शेखर रॉय ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन के आवास पर जाकर आधिकारिक तौर पर अपना इस्तीफा सौंपा। उन्होंने बयान दिया कि तृणमूल कांग्रेस में भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद उन्हें अलग-थलग किया गया और अपने विचार खुलकर रखने में बाधाएं आईं। इस आरोप की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी की आंतरिक व्यवस्थाएं जिम्मेदारी और पारदर्शिता से बहुत दूर हैं, जो उन्हें पार्टी छोड़ने पर मजबूर कर गईं।

इसके पहले कई टीएमसी नेता भी पार्टी छोड़ चुके हैं और ऐसे हालात में रॉय का इस्तीफा पार्टी के लिए एक गंभीर संकेत माना जा रहा है। शेखर रॉय ने कहा कि बंगाल की जनता टीएमसी के खिलाफ कई मुद्दों पर नाराज थी, जिनमें राजस्व और भ्रष्टाचार पर सवाल प्रमुख थे। उन्होंने मांग की है कि पिछले पांच वर्षों में बंगाल के हर कस्बे में फैले भ्रष्टाचार का फॉरेंसिक ऑडिट किया जाना चाहिए।

टीएमसी से इस्तीफे की चर्चाओं के बीच यह भी खबर आई है कि कोयल मलिक, जो इस साल अप्रैल में टीएमसी द्वारा राज्यसभा भेजी गईं, भी इस्तीफा देने पर विचार कर रही हैं। हालांकि अब तक उनके इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

शुखेंदु शेखर रॉय 2011 में टीएमसी में शामिल हुए थे और लंबे समय तक ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे। उन्होंने पार्टी के कई उतार-चढ़ाव में साथ दिया, लेकिन हालिया हार और पार्टी की अंदरूनी स्थिति ने उन्हें बीजेपी के करीब धकेल दिया है। रॉय ने बीजेपी की प्रशंसा भी की है, और माना जा रहा है कि वे जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

यह स्थिति पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ी हलचल मचा सकती है, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही सभी दल अपने समीकरण बदल रहे हैं। शेखर रॉय के इस्तीफे ने टीएमसी को एक नई चुनौती दी है, जबकि भाजपा इस अवसर का पूरा फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।

समापन में यह कहा जा सकता है कि टीएमसी और पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में यह घटनाक्रम आगामी महीनों में और अधिक महत्व हासिल करने वाला है। दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रही असंतुष्टि के कारण पार्टी को ज़मीनी स्तर पर भी नुकसान हो सकता है।

Edited By: Naveen R Rangiyal

Source

Related Articles

error: Content is protected !!