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जल निगम की लापरवाही नागरिकों पर पड़ रही भारी, स्थानीय लोगों को बिगड़े रास्तों से निकलना मुश्किल

 

 

जल निगम की लापरवाही नागरिकों पर भारी पड़ रही है। स्थानीय लोगों को बिगड़े रास्तों से निकलना मुश्किल हो रहा है। ऐसा ही कुछ हाल वार्ड नंबर 12 आजादपुरा तृतीय का बना हुआ है। यहां आए दिन कीचड़ में वाहन फंस रहे हैं तो राहगीरों को भी पैदल निकलने के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

 

बीते माहों में अमृत कार्यक्रम 2.0 के तहत विभित्र मोहगों में पाइप लाइन बिछाई गई। इसके उपरांत कई स्थानों पर खुदी सड़कों की मरम्मत कर दी गई तो कुछ स्थानों पर अभी भी पाइप लाइन बिछाने के बाद सड़क को ठीक नहीं किया गया

 

सड़क निर्माण में प्लांट की राख का हो रहा इस्तेमाल

 

है। इसका ताजा उदाहरण वार्ड नंबर 12 आजादपुरा तृतीय है। यहां पर दम्मू के कुआं के पास बारिश से रास्ता बिगड़ गया है और पूरे रास्ते में कीचड़ ही कीचड़ नजर आ रहा है। यहां दुपहिया वाहन और चार पहिया वाहन फंस रहे हैं। बीते दिनों भवन निर्माण सामग्री लेकर निकल रही पिकप फंस गई थी। इस वाहन को निकालने में वाहन चालक को पसीना आ गया था। वहीं, एक गैस एजेंसी की तिपहिया वाहन निकलते समय रास्ते में फंस गया। कड़ी मशक्कत के बाद इस वाहन को बिगड़े रास्ते से निकाला जा सका। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार पाइप लाइन बिछाने के लिए सड़क खोद दी। इसके बाद सड़क की मरम्मत नहीं की, जिससे इस रास्ते से

 

निकलना मुश्किल हो गया है। बारिश के बाद तो हालात और भी बिगड़ गए हैं, जिससे लोगों का जीवन नाराकीय हो गया है। जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय ही नजर आते हैं। जनता की समस्या सुनने के लिए उनके पास फुर्सत नहीं है। कई बार समस्या से अवगत कराया है पर न तो कोई भी जन प्रतिनिधि और न ही अधिकारी मौके पर पहुंचा। स्कूली ब%चों को भी निकलने में परेशानी हो रही है। आखिरकार इस स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार। ऐसा लगता है कि जनता को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है, जिससे लोगों की समस्याएं कम नहीं हो पा रही हैं।

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