लखनऊ

दिल्ली में अस्पतालों के पास आश्रय गृह लगभग खाली, जागरूकता की कमी बड़ी चुनौती

दिल्ली, भारत – राजधानी दिल्ली में अस्पतालों के पास बनाए गए आश्रय गृह जिनका उद्देश्य असहाय मरीजों और उनके परिजनों को अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराना है, लगभग खाली हुए हुए हैं। विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि इस समस्या का मुख्य कारण जागरूकता की कमी है जिससे इन आश्रय गृहों का लाभ सही तरीके से नहीं लिया जा पा रहा है।

दिल्ली सरकार ने हाल में शहर के कई प्रमुख अस्पतालों के पास आश्रय गृह स्थापित किए हैं। ये गृह विशेष रूप से ऐसे मरीजों और उनके परिवारों के लिए बनाए गए हैं जो आर्थिक तंगी या अन्य कारणों के चलते अस्पताल के निकट रहने में असमर्थ हैं। लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि इन आश्रय गृहों का उपयोग अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पा रहा है।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली के कई मुख्य अस्पतालों के पास बने आश्रय गृह लगभग खाली पड़े हैं। इसका कारण अस्पतालों के स्टाफ और मरीजों को इन सेवाओं के बारे में पर्याप्त जानकारी न मिलना भी बताया गया है। इसके साथ ही, शहर के निवासियों में इन आश्रय गृहों के महत्व और उपलब्धता को लेकर जागरूकता बहुत कम है।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “हमारे आश्रय गृह में आवासीय सुविधाएं पूरी तरह से सक्षम हैं, पर मरीज और उनके परिजन इसके बारे में नहीं जानते या इसे प्राथमिकता नहीं देते। इससे हमारे संसाधनों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता।”

इस समस्या के समाधान हेतु सरकार ने हाल ही में एक अभियान शुरू किया है जिसमें अस्पतालों, स्थानीय समुदायों और मीडिया के माध्यम से इन आश्रय गृहों की उपयोगिता और उपलब्धता के बारे में व्यापक जानकारी दी जा रही है। साथ ही निजी संस्थानों के साथ भी सहयोग बढ़ाकर इन सेवाओं का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि चिकित्सा संस्थानों को मरीजों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए जिससे उन्हें आश्रय गृहों के बारे में जानकारी मिल सके। इसके अलावा, अस्पतालों में सूचना काउंटर स्थापित किया जाना भी सहायक हो सकता है जहां मरीजों को तुरंत आश्रय सेवाओं के विकल्प समझाए जा सकें।

आश्रय गृहों की कमी या इनके खाली रहने के कारणों को समझना और उसका समय पर समाधान करना जरूरी है ताकि असहाय मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल में उचित चिकित्सा और आरामदायक आश्रय मिल सके। दिल्ली सरकार इस दिशा में गंभीर है और उम्मीद जगाती है कि आने वाले समय में जागरूकता अभियान के प्रभाव से इन आश्रय गृहों का भरपूर उपयोग होगा।

इस प्रकार, दिल्ली में अस्पतालों के पास आश्रय गृहों का खाली रहना एक बड़ी समस्या बनकर उभर रही है जिसे सही कदम उठाकर जल्दी ही दूर किया जा सकेगा। मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए जागरूकता बढ़ाना और प्रभावी प्रबंधन करना आवश्यक है ताकि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली और अधिक मजबूत हो सके।

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