नोएडा

ईरान युद्ध पर ट्रंप को अपनी संसद में मिला बड़ा झटका; भारत समेत 54 देशों पर लगेगा अतिरिक्त टैक्स!

वाशिंगटन, अमेरिका – अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को रोकने संबंधी वॉर पॉवर्स प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बुधवार को हुए मतदान में यह प्रस्ताव 215 के मुकाबले 208 वोटों से पारित हुआ, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे पहले अमेरिकी सीनेट भी इस तरह के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है।

इस महत्वपूर्ण फैसले ने देश की राजनीति में खलबली मचा दी है, क्योंकि ट्रंप के कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया। थॉमस मैसी, ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक, टॉम बैरेट और वॉरेन डेविडसन जैसे कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने पार्टी लाइन के खिलाफ युद्ध को रोकने के पक्ष में मतदान किया। यह कदम ट्रंप की नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज ने इस प्रस्ताव पास होने पर कहा कि यह महंगा और जोखिम भरा युद्ध अब समाप्त होना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संघर्ष पर अमेरिकी करदाताओं के 100 अरब डॉलर से अधिक खर्च हो चुके हैं, जिसने अमेरिका की स्थिति को कमजोर कर दिया है। जेफ्रीज ने आगे कहा कि अमेरिका को इस प्रकार की अंतहीन लड़ाइयों से बाहर निकलकर अपने आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

वहीं, हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप घरेलू मुद्दों पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप वैश्विक सहयोगियों के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से पूरी तरह खोलने के प्रयास कर रहे हैं, ताकि क्षेत्रीय तनाव को कम किया जा सके।

ट्रंप और नेतन्याहू के बीच कड़ी बातचीत

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया कि लेबनान में इजराइली सैन्य अभियानों को लेकर उनकी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ तीखी फोन वार्ता हुई थी। ट्रंप ने माना कि इस दौरान उन्होंने नेतन्याहू के प्रति कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। हालांकि, ट्रंप गुस्से में नहीं थे, लेकिन लगातार जारी सैन्य कार्रवाई से वे चिंतित और परेशान थे।

भारत समेत 54 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव

वहीं, एक और बड़ी खबर में अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि कार्यालय ने व्यापार कानून की धारा 301 के तहत भारत समेत 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया जा रहा है जो कथित रूप से जबरन मजदूरी से बने सामान का आयात रोकने में नाकाम रहे हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, सऊदी अरब, चीन, ब्राजील, ब्रिटेन जैसे प्रमुख देश भी शामिल हैं। भारत ने इन आरोपों को कड़ा खारिज किया है और इसे अनुचित करार दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव वैश्विक व्यापार संबंधों में नए तनाव पैदा कर सकता है और इससे प्रभावित देशों के बीच अमेरिका के आर्थिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिकी सरकार ने इस मामले पर आगे की सुनवाई के लिए संबंधित पक्षों के सुझाव आमंत्रित किए हैं।

इस प्रकार, देश के अंतरराष्ट्रीय संबंध और घरेलू राजनीति दोनों ही इस प्रस्ताव और सैन्य कार्रवाई के मद्देनजर काफी हद तक प्रभावित होने वाले हैं, जो आने वाले समय में अपनी छाप छोड़ेंगे।

रिपोर्टर: नरेन्द्र गुप्ता

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