एलपीजी वितरकों ने मांगों को लेकर खोला मोर्चा, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
कमीशन में 75 रुपये की अंतरिम बढ़ोतरी समेत सात सूत्रीय मांगें
26 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर धरने के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
ललितपुर। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (आई) के नेतृत्व में देशभर के एलपीजी वितरकों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। इसी क्रम में सोमवार को जिले के एलपीजी वितरकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से भारत की राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर तेल कंपनियों की कथित मनमानी, कमीशन से जुड़े मुद्दों तथा वितरकों पर बनाए जा रहे दबाव को समाप्त कराने की मांग की। वितरकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाते हुए 26 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। एसोसिएशन पदाधिकारियों के अनुसार, वितरक अपनी मांगों के समर्थन में 1 सितंबर 2026 से काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज करा रहे हैं। आंदोलन के अगले चरण में 21 सितंबर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, 5 अक्टूबर को देशव्यापी प्रेस कॉन्फ्रेंस, 6 अक्टूबर को नो मनी नो इंडेंट अभियान तथा 26 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित है। नो मनी नो इंडेंट अभियान के तहत वितरकों का कहना है कि वे पैसा जमा नहीं करेंगे और लोड भी नहीं लेंगे। वितरकों ने ज्ञापन में डेश नोवो स्टडी की संस्तुति के अनुरूप प्रशासनिक शुल्क एवं होम डिलीवरी प्रभार में तत्काल प्रभाव से 75 रुपये की अंतरिम वृद्धि किए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई है। उनका कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में वितरण व्यवस्था से जुड़े खर्चों को देखते हुए कमीशन में वृद्धि आवश्यक है। वितरकों ने प्रत्येक ई-केवाईसी के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों से 236 रुपये का भुगतान किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि ई-केवाईसी प्रक्रिया में वितरकों को अतिरिक्त कार्य और संसाधन लगाने पड़ते हैं, इसलिए इसके लिए निर्धारित भुगतान किया जाना चाहिए। ज्ञापन में सभी तेल कंपनियों से संसद द्वारा बनाए गए नियमों तथा द्रवीभूत पेट्रोलियम गैस प्रदाय और वितरण विनियमन आदेश की कंडिका 3(4) का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की गई है। वितरकों ने आरोप लगाया कि उन्हें उत्पादों की बिक्री के लिए दबाव का सामना करना पड़ता है। एसोसिएशन ने इसे समाप्त किए जाने की मांग की है। वितरकों ने किसी भी वितरक को नॉन-डोमेस्टिक एलपीजी सिलेंडर बेचने के लिए दबाव नहीं डालने तथा उनके इंडेंट में जबरन संशोधन नहीं किए जाने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का हवाला देते हुए स्नञ्जरु की कथित अवैध बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी उठाई। ज्ञापन में पीएनजी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग भी की गई है। एसोसिएशन का आरोप है कि निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए एमडीजी को अनिवार्य किया जाना उचित नहीं है। वितरकों ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुरूप नहीं बताते हुए व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। एलपीजी वितरकों ने नए घरेलू वर्ग के गैस कनेक्शन फिर से चालू किए जाने की मांग की। उनका कहना है कि नए घरेलू गैस कनेक्शन बंद किए जाने से वितरकों के काम और उपभोक्ताओं की सुविधा पर असर पड़ रहा है। एसोसिएशन ने इन कनेक्शनों को अविलंब बहाल करने की मांग की है। ज्ञापन में विक्रय अधिकारियों द्वारा किए जा रहे कथित अवैध कार्यों तथा रूष्ठत्र के नाम पर वितरकों को ब्लैकमेल किए जाने की कथित प्रथा पर रोक लगाने की मांग भी की गई। वितरकों ने संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा और शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन ने आंदोलन का आगामी कार्यक्रम भी घोषित किया है। इसके अनुसार 5 अक्टूबर को देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस, 6 अक्टूबर को नो मनी नो इंडेंट अभियान और 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। एसोसिएशन ने कहा है कि इसके बाद मांगों का समाधान नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन पर एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (आई) की जिला अध्यक्ष बासंती लरिया सहित आकाश जैन, अभिषेक कुमार जैन, इमरान खान, विश्वनाथ प्रताप पटेल, व्रजेश कुमार, विजय कुमार राठौर, विशाल यादव, आनंद सोनी, मनीष चतुर्वेदी, अभिलाष वर्मा, कपिल पटेरिया, बिबेक कुमार तिवारी, अभिजीत सिंह, दीपन बाल्मीकि, सुरेश लरिया, सुरेश रमण, अभय प्रताप, मनोज चतुर्वेदी, पुष्पेंद्र बड़ोनिया, आनंद यादव, उमाशंकर मोड़े, पंकज कुमार, सोनू बगवार, सचेंद्र राठौर और विकास जैन आदि ने हस्ताक्षर किए।




