पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर जबरदस्त उछाल: दिल्ली में पेट्रोल हुआ 102 के पार, जानिए 10 दिन में दाम कितने बढ़े
दिल्ली, दिल्ली
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर भारी वृद्धि दर्ज की गई है। सोमवार 25 मई को प्रमुख तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतों में 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गई है, जो आम जनता के लिए चिंता का विषय बन गई है। पिछले 10 दिनों के भीतर पेट्रोल के दाम करीब 7.35 रुपए और डीजल के दाम 7.53 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं।
दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपए हो गई है जबकि डीजल की कीमत 95.20 रुपए प्रति लीटर दर्ज की गई है। अन्य बड़े शहरों में भी महंगाई की लहर तेज है: कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपए तथा डीजल 99.82 रुपए प्रति लीटर हो गया है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपए और डीजल 99.55 रुपए प्रति लीटर है, जबकि मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपए और डीजल 97.83 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
पिछले 10 दिनों में कीमतों में उठापटक
15 मई को पहले ही दामों में 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। इसके बाद 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में औसतन 90 पैसे की बढ़ोतरी हुई। 23 मई को फिर से पेट्रोल के दाम 87 पैसे और डीजल के 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए गए। सोमवार को यह बढ़ोतरी और भी तेज हुई, जिससे आम उपभोक्ताओं के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।
महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारण
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इस तेजी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्ट्रेट ऑफ हारमुज से कच्चे तेल की सप्लाई में बाधा आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं।
दूसरी ओर, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर हुआ है, जिससे भारत के लिए कच्चे तेल का आयात और महंगा हो गया। हाल के महीनों में तेल कंपनियों को घाटा झेलना पड़ा, क्योंकि कीमतें स्थिर रखते हुए वे बढ़ती लागत को सहन कर रही थीं। अब घाटे को कम करने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी हो गई है।
इस महंगाई का आम जनता पर असर
डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे यात्रा और वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होगी। दूध, फल-सब्जी और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के दाम भी बढ़ने की संभावना है। पेट्रोल की महंगाई से निजी वाहन उपयोग करने वालों का खर्च बढ़ेगा, जिसके चलते बचत और खर्च में असंतुलन पैदा होगा।
इसके अलावा, उद्योगों पर भी दबाव बढ़ेगा क्योंकि उत्पादन लागत में वृद्धि होने से वस्तुओं की कीमतों में उछाल आएगा। लंबे समय तक तेल की महंगाई देश की आर्थिक मजबूती को प्रभावित कर सकती है और विकास कार्यों में रुकावट आ सकती है।
सरकार और तेल कंपनियों को स्थिति संभालने के लिए अब सतर्क रहना होगा ताकि सामान्य जनता पर इस महंगाई का कम से कम प्रभाव पड़े। आमदनी के अनुरूप खर्च समझदारी से करना और सरकारी नीतियों में सुधार आवश्यक हैं, ताकि इस चुनौती से निपटा जा सके।
लेखक: नरेन्द्र गुप्ता




